एनएचएआई ने पंजाब में अपनी विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई भूमि पर कब्जा दिलाने की हाईकोर्ट से मांग की थी। पंजाब में कुल 36 परियोजनाएं चल रही हैं,इनमें से 136.67 किलोमीटर पर एनएचएआई को माैका नहीं मिल पाया।
पंजाब में भूमि पर कब्जा न मिलने के कारण रुके पड़े हाईवे प्रोजेक्टों के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सभी डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिए कि वे नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को बिना किसी रुकावट के जमीन का कब्जा दिलवाएं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल चल रही मध्यस्थता की प्रक्रिया जमीन को एनएचएआई को सौंपने में रुकावट नहीं बन सकती। यदि कोई जमीन मालिक इसका विरोध करता है, तो ऐसे अवरोधों को सभी उपलब्ध साधनों से हटाया जाए। हाईकोर्ट ने एनएचएआई को भी निर्देश दिया है कि वह संबंधित अदालतों में आवेदन देकर कानूनी अड़चनों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू करे और आगामी 5 मई तक रिपोर्ट पेश करे। कोर्ट ने कुछ जमीन मालिकों द्वारा दायर उस याचिका को भी खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने इस मामले में पक्षकार बनने की मांग की थी।
यह आदेश जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस कुलदीप तिवारी की खंडपीठ ने एनएचएआई द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। एनएचएआई ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग की थी। एनएचएआई की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल ने कोर्ट को जानकारी दी कि पंजाब राज्य में कुल 36 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी कुल लंबाई 1288.31 किलोमीटर है, जबकि अब तक जिन जमीनों का कब्जा एनएचएआई को नहीं सौंपा गया है, वह 136.67 किलोमीटर है। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब सरकार के मुख्य सचिव द्वारा दायर शपथ पत्र में यह लंबाई 88.39 किलोमीटर बताई गई है।
पंजाब से हलफनामे से हाईकोर्ट असंतुष्ट
पिछली सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट मुख्य सचिव पंजाब द्वारा दायर हलफनामे से संतुष्ट नहीं था, क्योंकि इनमें बताया गया था कि किसान यूनियन धरने कर रही हैं और जमीन मालिक कब्जा वापस ले रहे हैं। इस वजह से जमीन का हस्तांतरण नहीं हो पा रहा है। इस पर कोर्ट ने संबंधित डिप्टी कमिश्नर और एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण देने को कहा था। चार अप्रैल को जब मामले की सुनवाई हुई, तब विभिन्न जिलों के डिप्टी कमिश्नरों ने जमीन सौंपने की समय सीमा कोर्ट के सामने रखी।
गुरदासपुर के डीसी ने चार सप्ताह में, तरनतारन के डीसी ने 3 मई तक, संगरूर के डीसी ने दो हफ्तों में, मलेरकोटला के डीसी ने 20 दिनों में, लुधियाना और जालंधर के डीसी ने दो हफ्तों में, कपूरथला के डीसी ने चार हफ्तों में, अमृतसर के डीसी ने 3 मई तक, मोगा के डीसी ने चार हफ्तों में, फाजिल्का और बरनाला के डीसी ने 30 अप्रैल तक जमीन सौंपने का विश्वास दिलाया है।