पंजाब की सियासत में आम आदमी पार्टी (आप) के लिए संगरूर सिर्फ लोकसभा क्षेत्र नहीं बल्कि उसकी सियासी राजधानी रहा है। इसी जमीन ने पार्टी को पंजाब में मजबूत आधार दिया और सत्ता तक पहुंचने का रास्ता बनाया। अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच आप के सामने अपने इस गढ़ को बचाए रखने की चुनौती है।
दिग्गजों और विधायकों का मजबूत गढ़
संगरूर संसदीय क्षेत्र मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह क्षेत्र है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा दिड़बा और आप के प्रदेश अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा सुनाम से विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने संसदीय क्षेत्र की सभी नौ सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया था।
धूरी से भगवंत मान, सुनाम से अमन अरोड़ा, दिड़बा से हरपाल सिंह चीमा, संगरूर से नरेंद्र कौर भराज, लहरा से बरिंदर कुमार गोयल, बरनाला से गुरमीत सिंह मीत हेयर, भदौड़ से लाभ सिंह उगोके, महल कलां से कुलवंत सिंह पंडोरी और मलेरकोटला से मोहम्मद जमील-उर-रहमान जीते थे।
मीत हेयर के 2024 में संगरूर से सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई बरनाला सीट पर नवंबर 2024 में उपचुनाव हुआ। इसमें कांग्रेस के कुलदीप सिंह ढिल्लों ने जीत दर्ज की। अब संगरूर लोकसभा क्षेत्र की नौ विधानसभा सीटों में आठ पर आप के विधायक हैं जबकि बरनाला कांग्रेस के पास है।
आप के लिए संगरूर का स्वर्णिम इतिहास
2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भगवंत मान ने लगातार दो बार बड़े अंतर से जीत दर्ज कर पार्टी की मजबूत नींव रखी। 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने सभी नौ सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि मान के मुख्यमंत्री बनने के करीब तीन महीने बाद हुए 2022 लोकसभा उपचुनाव में आप को बड़ा झटका लगा। शिअद (अमृतसर) के सिमरनजीत सिंह मान ने आप उम्मीदवार को हराकर पार्टी का किला ढहा दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में आप ने वापसी करते हुए सीट फिर जीत ली।
किसान आक्रोश सबसे बड़ी चुनौती
संगरूर और मालवा किसान राजनीति का प्रमुख केंद्र हैं। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ और सक्रियता है। दिल्ली आंदोलन से लेकर अब तक किसानों का केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ विरोध जारी रहा है।
मालवा के मतदाता राजनीतिक फैसलों के लिए भी जाने जाते हैं। यहां मतदाता नेताओं को सिर आंखों पर बैठाते हैं तो जरूरत पड़ने पर सत्ता से बाहर करने में भी देर नहीं लगाते। ऐसे में किसानों की नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसद और विधायकों की साख बचाना आप के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगी।