राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने सम्मान समारोह में स्वच्छता से जुड़ा एक ऐसा संस्मरण साझा किया जिसने उनकी जिंदगी की सोच बदल दी।
सिद्धू ने बताया कि पोते के जन्म के बाद वह अमेरिका में बेटे के पास गए थे। एक दिन परिवार के साथ घूमने निकले। रास्ते में पकौड़ियां और अन्य खाद्य सामग्री खाने के बाद जैसे ही उन्होंने खाली लिफाफा कार की खिड़की से बाहर फेंकने के लिए हाथ बढ़ाया तो बेटे ने तुरंत उनका हाथ पकड़ लिया। बेटे ने कहा, "क्या मेरा चालान करवाओगे? इसे बाहर मत फेंको, मुझे दे दो।"
इंदरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि स्वच्छता अभियान किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने चंडीगढ़ की स्वच्छता की सराहना की थी। उन्होंने लोगों से पॉलीथिन का उपयोग कम करने, कूड़ा इधर-उधर न फेंकने और अपने आसपास का क्षेत्र साफ रखने की अपील की। उनका कहना है कि अब वह सुबह सैर करने नहीं बल्कि सड़क पर पड़ा कूड़ा उठाने निकलते हैं।
सिद्धू ने कहा कि शुरुआत में लोग उनका मजाक उड़ाते थे। हाथों से कूड़ा उठाने पर ताने भी देते थे लेकिन उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं और जल स्रोत लगातार घट रहे हैं। ऐसे में स्वच्छता केवल आदत नहीं बल्कि पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जो लोग कूड़ा फैलाते हैं उनका भी धन्यवाद क्योंकि उसी से उन्हें शहर को साफ रखने का अवसर मिलता है। एनसीसी के दिनों से ही सफाई उनकी दिनचर्या का हिस्सा रही है।