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साड्डी मजबूरी ने सानूं कित्थे दा नी छड्डेया: दर्द... गांव में नहीं था कोई साधन, मजबूरी में जाना पड़ा विदेश

Mon, 10 Feb 2025 09:38 AM IST
शाहरुख खान रिंपी गुप्ता/नरिंदर वैद/पंकज शर्मा, अमर अमर उजाला, पंजाब

सार

पंजाब में बेरोजगारी की समस्या गंभीर है। सूबे के युवा रोजगार की तलाश में ही विदेश जा रहे हैं। लेकिन युवाओं को जमीन बेचकर, कर्ज लेकर 40 से 70 लाख रुपये लुटाने के बाद भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हो रहा। 
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लोगों का छलका दर्द - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में बेरोजगारी की समस्या गंभीर रूप धारण करती जा रही है। रोजगार की तलाश में सूबे के युवा विदेश भाग रहे हैं। पंजाब सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में करीब 50 हजार नौकरियां देने का दावा किया है। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अलग-अलग स्तर पर रोजगार मेले लगाए जा रहे हैं। कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को नौकरी के लिए सक्षम बनाया जा सके, लेकिन ये नाकाफी साबित हो रहा है। 
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पंजाब के बड़ी संख्या में युवा काम की तलाश में कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों का रुख कर रहे हैं। इसके लिए वे डंकी रूट जैसे अवैध और जोखिमपूर्ण रास्ता भी अपनाने को तैयार हैं। जमीन बेचकर, कर्ज लेकर 40 से 70 लाख रुपये लुटाने के बाद भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हो रहा। पूछने पर कहते हैं कि अगर उन्हें अपने गांव, कस्बे में ही रोजगार मिल जाए तो वे विदेश क्यों जाएं। वे मजबूरन गलत रास्ता चुन लेते हैं।

केस-1
गांव में नहीं था कोई साधन, मजबूरी में बाहर जाना पड़ा

अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटे जालंधर के गांव लाडरा के दविंदर सिंह से ज़ब लाखों रुपये लगाकर विदेश जाने के बजाय पंजाब में ही काम करने के बारे में पूछ तो उन्होंने कि गांव में रहने के कारण उनके पास रोजगार व अपने परिवार को अच्छी जिंदगी देने के लिए कोई अच्छा साधन नहीं था। विदेश जाकर मैं अपनी व परिवार की जिंदगी बनाना चाहता था। इसके चलते पहले दुबई गया था।
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मैं सीधे अमेरिका नहीं गया, बल्कि पहले से ही दुबई में काम कर रहा था। वहां पर किसी जानकर ने मेक्सिको से अमेरिका जाने की बात कही। बस अमेरिका पहुंचने के सपने के कारण मैं अपने जीवन भर की कमाई लगाकर व कर्ज उठाकर अमेरिका जाने के लिए निकल पड़ा था। मैंने कोई गलत रास्ता नहीं अपनाया बल्कि एजेंट ने मेरे साथ धोखा किया।

केस :2
अपना काम शुरू करने को नहीं मिला लोन

अमेरिका से डिपोर्ट होकर आए गांव सलेमपुरा के दलेर सिंह ने कहा कि रिश्तेदारों के अलावा अपनी पूंजी इकट्ठा कर एजेंट को 60 लाख रुपये देकर अमेरिका पहुंचा था। मैं मिनी बस चलाता था। इससे परिवार का पालन पोषण नहीं हो पा रहा था। अपना काम शुरू करने के लिए लोन लेने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिला। मैं गाड़ी खरीद कर ड्राइवरी करना चाहता था, लेकिन पैसों की कमी रुकावट बनती थी। वहीं, रेगुलर दिहाड़ी नहीं लगती थी। दिन-रात काम करने के बावजूद बहुत कम पैसे मिलते थे। मजबूरीवश बाहर जाने की सोची। सोचा था कि छह माह में कर्ज खत्म कर दूंगा। युवाओं को छोटे प्रोजेक्ट देकर उन्हें सब्सिडी पर कर्ज की सुविधा मिले तो कोई भी विदेश नहीं जाना चाहेगा। हालांकि अब लगता है कि इतने पैसे में अपना बिजनेस स्टैंड कर सकता था।

केस 3
दूध बेचने का काम शुरू किया, लेकिन लागत ज्यादा व मुनाफा कम था

पटियाला के गांव किशनगढ़ के 44 साल के गुरविंदर सिंह का कहना है कि अगर सरकार पंजाब में ही युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध करा दे, तो फिर उन्हें विदेशों का रुख न करना पड़े। उनके पास केवल तीन बीघा खेतीबाड़ी योग्य जमीन है। इस पर खेती करके परिवार का गुजारा नहीं हो पा रहा था। इसलिए किसी तरह से पैसे जुटाकर चार गाय खरीद करके इनका दूध बेचने का काम शुरू किया गया, लेकिन लागत ज्यादा पड़ गई और कुछ बच नहीं रहा था। इसलिए इस काम को बंद करना पड़ा। फिर सोचा विदेश जाकर कुछ सालों में अच्छे पैसे कमा लंगूा। बच्चों को भी बेहतर जीवन दे पाऊंगा। 19 साल का बेटा है, जो ग्यारहवीं की पढ़ाई कर रहा है। मैंने जमीन व पत्नी के गहने बेच कर, घर को गिरवी रखकर व उधार लेकर 45 लाख जुटाए थे, लेकिन सब बर्बाद हो गया।

रोजगार मेलों में 5-10 फीसदी युवाओं को ही मिल रही नौकरी
जानकारों का कहना है कि रोजगार मेलों में 5-10 फीसदी युवाओं को नौकरी मिल रही है। साथ ही ज्यादातर युवा ऐसी नौकरी से संतुष्ट नहीं होते हैं। योग्यता के अनुसार पद व वेतन नहीं मिलता है, जिसके चलते वह काम करने में असमर्थ होते हैं। पंजाब में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की तरफ से पिछले वर्ष दिसंबर में बेरोजगारी दर को लेकर संसद में रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें सामने आया था कि पंजाब में बेरोजगारी दल पहले कम जरूर हुई है, लेकिन अभी भी यह राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर से अधिक है। वर्ष 2022-23 में 15 वर्ष व इससे अधिक आयु के लोगों में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर जहां 3.2 प्रतिशत रही, वहीं पंजाब में यह दर 6.1 प्रतिशत है।

2022-2023 में 16.9 फीसदी स्नातक बेरोजगार
पंजाब की श्रम बल भागीदारी दर 2021-22 में 41.3 फीसदी की तुलना में 2022-2023 में 42.3 फीसदी थी, जबकि श्रमिक जनसंख्या अनुपात 2022-23 में 38.6 फीसदी से बढ़कर 39.7 फीसदी हो गया। इस अवधि के दौरान 16.9 फीसदी स्नातक बेरोजगार थे और स्नातकोत्तर या उच्च शिक्षा वाले 8.4 फीसदी व्यक्तियों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। जुलाई 2021 से जून 2022 के बीच, राज्य में स्नातकोत्तर के लिए बेरोजगारी दर 11.1 फीसदी बताई गई थी स्नातक और स्नातकोत्तर की योग्यता वाले 18.9 फीसदी बेरोजगार थे, जबकि डिप्लोमा धारकों के बीच बेरोजगारी की दर 11.7 फीसदी थी। डिप्लोमा धारकों के लिए 15.1 फीसदी थी।
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घर-घर नौकरी का वादा नहीं हुआ पूरा
बेरोजगारी साझा मोर्चा के संयोजक सुखविंदर सिंह का कहना है कि पिछले काफी समय से सरकारें घर-घर रोजगार देने का वादा कर रही हैं, लेकिन उसको पूरा नहीं कर रही हैं। शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग में सबसे अधिक पद खाली पड़े हैं, उनको भरने को लेकर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है। सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट देने की मांग भी पूरी नहीं की जा रही है। जब सरकार कोई भर्ती निकालती भी है, उतने समय में भर्ती का इंतजार करके युवाओं की उम्र ही निकल जाती है। सरकार को नियमों में बदलाव करने की जरूरत है।
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