2025 की भीषण बाढ़ के बाद पंजाब सरकार ने इस बार मानसून से पहले व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल स्रोत विभाग ने राज्य में 109 बाढ़ संवेदनशील स्थानों की पहचान की है जहां से बाढ़ का खतरा सबसे अधिक है। इन स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। विभाग के अधिकारी अपनी टीमों के साथ तटबंधों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से पहले जरूरी इंतजाम पूरे किए जा सकें।
सरकार का मुख्य फोकस तटबंधों को मजबूत करने और जल निकासी व्यवस्था सुधारने पर है। बाढ़ के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए राज्य के 850 में से 849 तटबंध अधिसूचित किए जा चुके हैं। शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों से गुजरने वाली बड़ी और छोटी ड्रेनों की सफाई और मरम्मत भी कराई जा रही है। आपात स्थिति से निपटने के लिए सीमेंट के खाली और भरे बैगों का भी पर्याप्त इंतजाम किया गया है।
जल स्रोत विभाग के अनुसार पंजाब में लगभग 939 किलोमीटर लंबाई तक नदियों का जाल और 8,100 किलोमीटर से अधिक का ड्रेनेज नेटवर्क है। इनमें से 915 किलोमीटर तटबंध मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न जिलों में 223 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा के 239 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 536 कार्य अंतिम चरण में हैं। विभाग का कहना है कि 98 किलोमीटर तटबंधों को ऊंचा करने के लिए 36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दक्षिण-पश्चिम पंजाब में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए भूमिगत जल निकासी कार्यों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए 30 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 12 नई परियोजनाएं भी तैयार की गई हैं।