पंजाब में थिएटर को मनोरंजन कर से मुक्त करवाने और देश को कॉमेडियन किंग कपिल शर्मा देने वाली अमृतसर की पंजाब नाटशाला पर पिछले आठ माह से ताला लटका हुआ है। कभी रंगमंच और हास्य कलाकारों की प्रतिभा को निखारने वाले इस मंच से कपिल शर्मा के अलावा भारती सिंह, राजीव ठाकुर और चंदन प्रभाकर जैसे कलाकारों ने भी अपनी पहचान बनाई।
पंजाब नाटशाला के संस्थापक और शिरोमणि नाटककार जतिंदर बराड़ का 25 जनवरी 2026 को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद से नाटशाला के मंच पर कोई नाटक प्रस्तुत नहीं किया गया।
शिरोमणि नाटककार केवल धालीवाल ने बताया कि जतिंदर बराड़ ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से पंजाब के रंगमंच को नई दिशा दी। उनके लिखे नाटकों में कुदेसन, पायदान, फासले, मिर्च-मसाला, डॉटर ऑफ द विन, मिर्जा साहिबा, अग्नि परीक्षा, बिन बुलाए मेहमान, टोया, सब्ज बाग, अरमान, अहसास, पहचान, रव नाल चैट और साका जलियांवाला बाग सहित कई रचनाएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि बराड़ ने 1965 में स्कूल के दिनों में अपना पहला नाटक डॉरमेट्री मंचित किया था। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में भटकते रहे। वर्ष 1998 में उन्होंने खालसा कॉलेज के सामने अपनी फैक्ट्री को ओपन एयर थिएटर में बदल दिया और बाद में पंजाब नाटशाला की नींव रखी। आज यह नाटशाला भारत ही नहीं, विदेशों में भी बेहतरीन रंगमंच केंद्रों में गिनी जाती है।
पंजाब नाटशाला के मंच पर दोबारा गूंजेगी कलाकारों की आवाज
पंजाब नाटशाला के मैनेजर सुनील कुमार ने बताया कि आने वाले दिनों में नाटशाला में दोबारा नाटकों का मंचन शुरू किया जाएगा। बराड़ साहिब के निधन से कलाकारों में निराशा थी, लेकिन अब एक बार फिर नाटशाला के मंच पर कलाकारों की आवाज गूंजेगी।