पंजाब कांग्रेस में बागी नेताओं का नेतृत्व कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के बीच दो घंटे बैठक हुई।
बैठक के बाद बघेल ने कहा कि जिन साथियों ने अपनी बात रखी है मैं उसकी रिपोर्ट बनाकर हाईकमान को दे दूंगा। उन्होंने फिर दोहराया कि हाईकमान के फैसले से किसी को कोई एतराज नहीं है। मीटिंग के बाद बघेल रायपुर के लिए रवाना हो गए।
बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि हमें पंजाब में डटकर लड़ना है, इसलिए हमें विरोधी पार्टियों से समझौता करने वाले लीडर नहीं चाहिए। वहीं बैठक से पहले चन्नी ने कहा था कि तेल देखेंगे और तेल की धार, फिर अगला फैसला लेंगे।
चन्नी गुट के विधायक राणा गुरजीत के घर बैठक के लिए पहुंचे। चन्नी के बयान ने बैठक के एजेंडे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैठक में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सेक्रेटरी इंचार्ज सूरज ठाकुर और दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह सिद्धू भी पहुंचे हैं।
वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बुलाने की क्या जरूरत है, वह प्रदेश अध्यक्ष हैं खुद ही मीटिंग में आ जाएं। वहीं प्रदेश अध्यक्ष वड़िंग ने कहा कि मुझे मीटिंग का न्योता नहीं मिला इसलिए नहीं जाऊंगा। विधायक परगट सिंह ने कहा कि यह विचारों में भिन्नता का सवाल है, इसे बगावत का नाम न दिया जाए। सभी वरिष्ठ नेता जब बैठेंगे तो निश्चित तौर पर सकारात्मक परिणाम सामने आएगा।
बैठक में भाग लेने के लिए परगट सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, संगत सिंह गिलजियां, सुखविंदर सिंह रंधावा, भारत भूषण आशू, विधायक वरिंदर सिंह पाड़ा, अरुण चौधरी तृप्त बाजवा, बरनाला से विधायक कुलदीप सिंह काका ढिल्लों राणा गुरजीत के आवास पर पहुंच चुके हैं।
इससे पहले शुक्रवार को भी चन्नी बघेल से मिलने नहीं पहुंचे। चन्नी खेमे के अधिकतर वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पूर्व विधायकों ने भी बघेल से दूरी बनाए रखी है। प्रदेश प्रभारी ने खुद चन्नी को फोन कर उनके साथ चाय पर मुलाकात की इच्छा जताई, जिस पर चन्नी सहमत हो गए।