चन्नी, रंधावा, वडिंग और सभी छोटे-बड़े कांग्रेसी मेरी टीम के मंझे खिलाड़ी हैं। विधानसभा चुनाव में यही कांग्रेस की सबसे बड़ी टीम बनेगी। पार्टी की यही मजबूती है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान ओलंपियन परगट सिंह ने अपनी बात रखी।
इंडियन हॉकी टीम के पूर्व कप्तान एवं ओलंपियन परगट सिंह नई सियासी पारी को अपने खेल अनुभव के सहयोग से आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। वे भली-भांति जानते हैं कि मुकाबले तभी जीते जाते हैं, जब नेतृत्व मजबूत हो, प्रतिद्वंद्वी की रणनीति ध्वस्त करने का हुनर आपके पास हो और सबसे बड़ी बात, टीम एकजुट हो।
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फिर भले ही मैदान खेल का हो या सियासत का। परगट अपनी नई जिम्मेदारी की शुरुआत कुछ इसी अंदाज में करने वाले हैं। नए पद का दायित्व मिलने के बाद वे शनिवार को नई दिल्ली में प्रभारी सचिन पायलट से मिले। परगट ने पायलट से संगठन, आगामी चुनाव की तैयारियों, पार्टी नेताओं को एक साथ लेकर चलने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की।
उन्होंने श्री बंगला साहिब गुरुद्वारे और श्री हनुमान मंदिर में माथा टेककर पंजाब और पंजाबियों की समृद्धि व खुशहाली के लिए प्रार्थना भी की। परगट ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
सवाल: नए पद की बड़ी चुनौती क्या मानते हैं?
जवाब: मैं बहुत बड़ी बात नहीं कर रहा हूं, मगर में कहना चाहूंगा कि पंजाब में कांग्रेस के समक्ष आज कोई भी बड़ी राजनीतिक चुनौती है ही नहीं। जनता कांग्रेस को दोबारा अपनी सेवा का मौका देने का मन बनाए बैठी है। कांग्रेस की टीम तैयार है, वर्कर कई दौर का ग्राउंड सर्वे कर रहे हैं। जो ग्राउंड पर है, उसी के आधार पर यह बात मजबूती से कह रहा हूं। चुनावी मैदान में विरोधियों की टीमों को कांग्रेस बिखेरकर रख देगी।
सूबा प्रधान के लिए अचानक आपके नाम पर सहमति कैसे बनी?
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का वर्क कल्चर अब बहुत ज्यादा बदल चुका है। इसी वर्क कल्चर के तहत हमारे नए प्रभारी सचिन पायलट भी पिछले करीब एक महीने से पंजाब में सिर्फ फीडबैक पर ही काम कर रहे थे। यह तो मालूम था कि पैनल में मेरा नाम है, मगर उम्मीद कम थी। अब केंद्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी है, उसका तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हुए उस पर खरा उतरना और सूबे में कांग्रेस की सरकार बनाना मेरे लिए चुनौती से कम नहीं है।
जीत के लिए एकजुटता चाहिए, वो कैसे होगी?
यह नैरेटिव गलत है कि पंजाब में कांग्रेसी बंटे हुए हैं। मैं पहले भी कहता आया हूं और आज भी दोहरा रहा हूं कि साथियों में किसी भी मुद्दे पर मतभेद हो सकता है, मगर मनभेद कभी नहीं है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी हों या पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा, सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग व अन्य सभी छोटे-बड़े कांग्रेसी नेता, सभी मेरे बहुत आदरणीय हैं और उन लोगों से सीखकर ही में यहां तक पहुंचा हूं।
चुनाव में मुख्य मुकाबला किससे मानते हैं?
कट्टरपंथ, नफरत और लूट, ये तीनों चीजें पंजाबियों की फितरत से मेल नहीं खाती हैं, लेकिन भाजपा और आम आदमी पार्टी इसी लाइन पर अपनी सियासत को आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार में रहते आप पंजाब को लूट रही है और भाजपा नफरत की राजनीति यहां भी करना चाहती है। मुकाबला न तो भाजपा से है और न ही शिअद से। कांग्रेस का मुकाबला आप से ही रहेगा। चुनावी प्रतिस्पर्धा की रणनीति हमारे प्रभारी सचिन पायलट समेत वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बैठकर बनाएंगे और चुनाव प्रचार की शुरुआत राहुल गांधी की यात्रा से करने की योजना है।
आप खिलाड़ी भी रहे और पुलिस में भी, काम का अंदाज कैसा होगा?
मेरे लिए खेल और सियासत के मैदान में कोई ज्यादा फर्क नहीं है। मैं पिछली तरफ से फुलबैंक की तरह खेलता था और सियासत में भी ऐसा ही खेलूंगा। प्रतिद्वंद्वियों का गोलकीपर कैसा होगा, वैसे ही अपनी रणनीति तय कर लेंगे। वडिंग, रंधावा, चन्नी, बाजवा, औजला सरीखे बहुत अनुभवी और ऑलराउंडर खिलाड़ी मेरी टीम में हैं। नेतृत्व राहुल गांधी करेंगे और सभी अपनी-अपनी पोजिशन पर खेलेंगे। बदलाव तो ऑनगोइंग प्रोसेस है। रही बात पुलिस की, सरकार आई तो पुलिस में काली भेड़ों को उनकी जगह दिखाएंगे और पुलिस को प्रोफेशनल बनाएंगे।