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पंजाब में पूर्व सीएम चन्नी की बगावत: हाईकमान के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन, राजा वड़िंग के खिलाफ खोला मोर्चा

Fri, 03 Jul 2026 04:10 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, रोपड़

सार

पंजाब के कई वरिष्ठ नेता प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने के लिए हाईकमान पर लगातार दबाव बना रहे थे। हाईकमान ने पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल की सलाह को तरजीह देते हुए सूबे का नेतृत्व नहीं बदला। इसी से वरिष्ठ नेताओं में खासी नाराजगी है। जिसके चलते नाराज नेता इस फैसले के खिलाफ लामबंद हो सकते हैं।
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चरणजीत चन्नी के घर पहुंचे नेता - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पंजाब में सांसद एवं पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान के फैसले के खिलाफ बगावत कर दी है। सूबे में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ी फूट उजागर हो गई है। माैजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को मानने से इन्कार करते हुए उन्होंने शुक्रवार को मोरिंडा आवास पर अपने समर्थक नेताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। ढाई घंटे बैठक करने के बाद यह फैसला किया गया कि पूर्व सीएम चन्नी हाईकमान से दोबारा मिलकर इस फैसले पर चर्चा करेंगे। सभी नेताओं ने इस बाबत रणनीति तय करने के अधिकार भी चन्नी को दिए।
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हालांकि बैठक में चन्नी ने सभी विधायकों, सांसदों, हल्का प्रभारियों, जिलाध्यक्षों समेत अन्य प्रकोष्ठों के नेताओं को बुलाया था। बैठक में पूर्व डिप्टी सीएम ओम प्रकाश सोनी, विधायक राणा गुरजीत, कुलदीप सिंह काका ढिल्लों, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, पूर्व मंत्री भरत भूषण आशु, पूर्व मंत्री दर्शन सिंह बराड़, 23 पूर्व विधायक समेत करीब 62 नेता माैजूद रहे। हालांकि 11 विधायकों और सांसदों ने चन्नी की बैठक से दूरी बनाए रखी।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि पूर्व सीएम चन्नी के राजनीतिक कद के अनुरूप उन्हें संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई। बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि पार्टी हाईकमान को पंजाब के लोगों की भावनाओं और कार्यकर्ताओं की आवाज को समझते हुए फैसला लेना चाहिए था। बैठक के बाद कांग्रेस नेता दर्शन सिंह बराड़ ने दो टूक कहा कि यहां पहुंचे नेताओं को पंजाब के प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग का नेतृत्व में काम करना मंजूर नहीं है।
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बैठक में अन्य नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि साल 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस पूर्व सीएम चन्नी के नेतृत्व में मजबूती से लड़ सकती है। नेताओं ने दावा किया कि चन्नी प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री पद के चेहरे के लिए सबसे उपयुक्त हैं। हालांकि कुछेक नेताओं ने पार्टी के दायरे में रहते हुए कहा कि हाईकमान के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन जहां बदलाव की जरूरत है, वहां संशोधन किया जाना चाहिए ताकि कांग्रेस पंजाब में सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सके।

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चन्नी हाईकमान से बात करेंगे

विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि चन्नी को पार्टी हाईकमान से बातचीत करने का पूरा अधिकार दिया गया है। चन्नी पंजाब के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को हाईकमान के सामने रखेंगे। बाजवा ने कहा कि हाईकमान द्वारा जारी की गई नई सूची से कार्यकर्ताओं और आम लोगों में निराशा है तथा यह सूची लोगों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने हाईकमान से इस सूची पर दोबारा विचार करने की अपील करते हुए कहा कि संगठन का गठन इस प्रकार होना चाहिए जिससे पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाने का रास्ता मजबूत हो सके।

इसलिए हुई बगावत
दरअसल, पंजाब के कांग्रेस नेता विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश नेतृत्व में बदलाव चाहते थे। अभी सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग प्रदेशाध्यक्ष हैं। हाईकमान ने विधानसभा चुनाव से पहले नेतृत्व में बदलाव से इन्कार कर दिया और वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं चुनाव की तैयारियों से संबंधित मेनिफेस्टो कमेटी, प्रचार कमेटी, चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय कमेटी और कोर कमेटी में एडजस्ट कर दिया। इससे कई नेता असंतुष्ट हो गए। इन कमेटियों में पूर्व सीएम चन्नी को प्रचार कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। चन्नी समेत अन्य नेता हाईकमान के इस फैसले से नाराज हो गए और शु्क्रवार को चन्नी ने अपने समर्थकों के साथ बैठक कर शक्ति प्रदर्शन करते हुए हाईकमान को चुनाैती दे डाली।

सांसद रंधावा शाह से मिले
शुक्रवार को सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले। इस मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में भारी हलचल इसलिए मचाई क्योंकि इसकी टाइमिंग संवेदनशील रही। इधर पूर्व सीएम चन्नी की बगावत उधर रंधावा की शाह से मुलाकात ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया। कयास लगाए जा रहे हैं कि रंधावा भी नई कोर कमेटी में अपनी भूमिका से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि सांसद रंधावा ने इसे विशुद्ध रूप से पंजाब के हित की गैर राजनीतिक मुलाकात बताया और इसे किसी राजनीतिक दल-बदल या सियासी रार से न जोड़ने की अपील की। रंधावा ने कहा कि उन्होंने डेढ़ माह पहले गृह मंत्री से मिलने का समय मांगा है जोकि शुक्रवार को मिला।

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