पंजाब में सांसद एवं पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान के फैसले के खिलाफ बगावत कर दी है। सूबे में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ी फूट उजागर हो गई है। माैजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को मानने से इन्कार करते हुए उन्होंने शुक्रवार को मोरिंडा आवास पर अपने समर्थक नेताओं के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। ढाई घंटे बैठक करने के बाद यह फैसला किया गया कि पूर्व सीएम चन्नी हाईकमान से दोबारा मिलकर इस फैसले पर चर्चा करेंगे। सभी नेताओं ने इस बाबत रणनीति तय करने के अधिकार भी चन्नी को दिए।
हालांकि बैठक में चन्नी ने सभी विधायकों, सांसदों, हल्का प्रभारियों, जिलाध्यक्षों समेत अन्य प्रकोष्ठों के नेताओं को बुलाया था। बैठक में पूर्व डिप्टी सीएम ओम प्रकाश सोनी, विधायक राणा गुरजीत, कुलदीप सिंह काका ढिल्लों, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, पूर्व मंत्री भरत भूषण आशु, पूर्व मंत्री दर्शन सिंह बराड़, 23 पूर्व विधायक समेत करीब 62 नेता माैजूद रहे। हालांकि 11 विधायकों और सांसदों ने चन्नी की बैठक से दूरी बनाए रखी।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि पूर्व सीएम चन्नी के राजनीतिक कद के अनुरूप उन्हें संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई। बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि पार्टी हाईकमान को पंजाब के लोगों की भावनाओं और कार्यकर्ताओं की आवाज को समझते हुए फैसला लेना चाहिए था। बैठक के बाद कांग्रेस नेता दर्शन सिंह बराड़ ने दो टूक कहा कि यहां पहुंचे नेताओं को पंजाब के प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग का नेतृत्व में काम करना मंजूर नहीं है।
बैठक में अन्य नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि साल 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस पूर्व सीएम चन्नी के नेतृत्व में मजबूती से लड़ सकती है। नेताओं ने दावा किया कि चन्नी प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री पद के चेहरे के लिए सबसे उपयुक्त हैं। हालांकि कुछेक नेताओं ने पार्टी के दायरे में रहते हुए कहा कि हाईकमान के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन जहां बदलाव की जरूरत है, वहां संशोधन किया जाना चाहिए ताकि कांग्रेस पंजाब में सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सके।