गुरदासपुर में लाइन में लगे मतदाता
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गुरदासपुर की तीन प्रमुख नगर परिषदों गुरदासपुर, दीनानगर और कादियां के चुनाव नतीजों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुरदासपुर और दीनानगर में सबसे अधिक सीटें हासिल कीं। कादियां में शिरोमणि अकाली दल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरा। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को तीनों नगर परिषदों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
वहीं नगर काउंसिल शामचाैरासी में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। पार्टी ने 9 में से 6 वार्डों में जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 2 वार्डों में सफलता मिली, जबकि एक वार्ड निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता। अंतिम मतदान 76.33 फीसदी दर्ज किया गया।
गुरदासपुर में कांग्रेस ने 21 वार्ड जीते
29 वार्डों वाली गुरदासपुर नगर परिषद में कांग्रेस ने 21 सीटें जीतकर शानदार बढ़त हासिल की। आम आदमी पार्टी को 7 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा। कांग्रेस की ओर से वार्ड 2 से रमणदीप ने 627 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। आम आदमी पार्टी के योगेश शर्मा ने वार्ड 9 से 454 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर अपनी पार्टी की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। सबसे कांटे का मुकाबला वार्ड नंबर 28 में देखने को मिला, जहां कांग्रेस की अंजू बाला मात्र 8 वोटों के अंतर से विजयी रहीं। वार्ड 4 से निर्दलीय उम्मीदवार आशा रानी ने 21 वोटों से जीत दर्ज की।
दीनानगर में कांग्रेस को सात सीट मिली
दीनानगर नगर परिषद के 15 वार्डों में कांग्रेस ने 7 सीटें जीतकर बढ़त बनाई, जबकि आम आदमी पार्टी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की। भारतीय जनता पार्टी को 1 सीट मिली। कांग्रेस के जगरूप सिंह (वार्ड 5) ने 157 और मनोज गुप्ता (वार्ड 13) ने 178 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। आम आदमी पार्टी की परवीन कुमारी ने वार्ड 4 से 401 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। भाजपा के अश्वनी कुमार ने वार्ड 15 से 243 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
कादियां में छह वार्ड जीत सबसे बड़ी पार्टी बनी शिअद
कादियां नगर परिषद के 15 वार्डों में शिरोमणि अकाली दल ने 6 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। कांग्रेस को 4, आम आदमी पार्टी को 2, भाजपा को 1 तथा निर्दलीय उम्मीदवारों को 2 सीटें मिलीं। वार्ड 6 से निर्दलीय उम्मीदवार अतिया तुल वहीद ताहिरा निर्विरोध चुनी गईं। तीनों नगर परिषदों के कुल 59 वार्डों में कांग्रेस ने 32 सीटें जीतकर सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की। आम आदमी पार्टी को 15 सीटें मिलीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल ने 6 सीटें, भाजपा ने 2 सीटें और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की।