कांग्रेस को साल 2024 के भ्रम से बाहर निकलना होगा
पंजाब कांग्रेस ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी आप को पछाड़कर 7 सीटों पर अपने सांसद बनाए थे। आप को 3 सीटें मिली थीं। एक शिअद और दो आजाद प्रत्याशी जीते थे। कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग अभी तक इस बात का प्रचार करते हैं कि साल 2024 के लोकसभा में कांग्रेस को पूरे पंजाब में विधानसभा वार भी आप से ज्यादा बढ़त मिली थी। वे इस बढ़त को साल 2027 से जोड़ते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का दावा करते हैं।
कांग्रेस को इसी भ्रम से बाहर निकलना होगा क्योंकि साल 2024 के बाद हुए उपचुनावों, पंचायत चुनाव और अब निकाय चुनाव तीनों में कांग्रेस प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब रहा है। दूसरा, कांग्रेस की खींचतान भी सूबे में पार्टी कैडर को नुकसान पहुंचा रही है। हालांकि बरनाला में राहुल गांधी ने रैली के दौरान मंच से सभी कांग्रेसी नेताओं को एकजुटता के लिए कड़ा संदेश दिया था मगर नतीजे बताते हैं कि अभी स्थिति ठीक नहीं है।
निकाय चुनाव में सतारूढ़ आप ने सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद कांग्रेस ने हर सीट पर डटकर मुकाबला किया। पंजाब में चुनाव के दौरान सरकार की साम, दाम, दंड, भेद की नीति का खुला प्रदर्शन देखने को मिला। असली मुकाबला 2027 के विधानसभा चुनाव में होगा - अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, अध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस
शिअद की चुनाैतियां बढ़ीं
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सूबे की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी है। चार बार सत्ता संभाल चुकी है मगर भाजपा के साथ गठबंधन में। शहरी वोटरों को भाजपा साधती थी और ग्रामीण व पंथक मतदाताओं पर शिअद की अच्छी पकड़ थी। गठबंधन टूटा, राहें जुदा हुईं और बढ़ गई चुनौतियां। बसपा को अपना साथी बनाया मगर दाल नहीं गली। इस निकाय चुनाव में भी शहरी जनाधार पर कमजोर पकड़ ही शिअद की खराब प्रदर्शन की बड़ी वजह बनी।
ग्रामीण मतदाताओं पर केंद्रित पंचायत चुनाव के परिणामों में भले ही शिअद ने अपेक्षाकृत प्रदर्शन सुधारा लेकिन शहरी वोटरों ने खुलकर समर्थन नहीं दिया। पार्टी के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इसी साल 47 विधानसभा रैलियां की, इसे विधानसभा चुनावों की तैयारियां कहा गया मगर सभी रैलियां ग्रामीण अंचलों में हुईं। रणनीति यहीं बोझिल दिखी क्योंकि जब शिअद को मालूम था कि ग्रामीण मतदाताओं पर उनकी पकड़ ठीकठाक और सिर पर निकाय चुनाव है तो इन रैलियां को शहरी विधानसभा हलकों में शिफ्ट किया जा सकता था। साल 2022 के विधानसभा में भी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं था। शहरी मतदाताओं पर पकड़ के लिए नई रणनीति बनानी होगी।
निकाय चुनाव में सभी उम्मीदवारों और पार्टी द्वारा समर्थित बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों को हार्दिक बधाई। व्यापक दमन के बावजूद पंजाब की जनता ने स्पष्ट रूप से दिखा दिया है कि उनका विश्वास किसमें है। यह एक सशक्त संदेश है। एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विधानसभा चुनाव में आप को पूरी तरह से नकार दिया जाएगा और शिरोमणि अकाली दल की जीत होगी। - सुखबीर सिंह बादल, अध्यक्ष, शिअद