कांग्रेस-शिअद का प्रदर्शन लचर
कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत निराशाजनक रहा जबकि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को भी नुकसान हुआ। कांग्रेस और शिअद के प्रदर्शन का जिक्र करना इसलिए जरूरी है क्योंकि दोनों दलों ने लंबा समय तक पंजाब सूबे की सत्ता को संभाला है। ऐसी स्थिति में निकाय चुनाव में इन दलों के ऐसे हश्र की उम्मीद नहीं थी वो भी तब जब पिछले साढ़े चार साल से पार्टी के आला नेता आप सरकार की घेराबंदी में जुटे हुए थे। इन दलों की घेराबंदी ध्वस्त हुई।
कांग्रेस का बिगड़ा गणित
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में 13 में से 7 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस इस बात का दावा कर रही थी कि उन्होंने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में आप की आंधी (117 में से 92 सीटों पर जीत) को रोक दिया है। आला नेता भी शहरी और ग्रामीण मतदाताओं पर पार्टी की पकड़ को मजबूत बता रहे थे मगर साल 2026 के निकाय चुनाव के नतीजों ने तस्वीर ही बदल दी। साल 2021 के निकाय चुनाव में 1432 सीटें जीतने वाली कांग्रेस अबकी बार 384 सीटों पर ही सिमट गई। कांग्रेस के इस हश्र का मुद्दा पार्टी हाईकमान में राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तक उठा, फिलहाल अब चिंतन होगा।
कमजोर दिखा बादल का दल
शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल अपने शिरोमणि अकाली दल को इस चुनाव में कुछ खास नहीं दिलवा पाए। साल 2021 में भी शिअद सत्ता से बाहर थी मगर फिर भी निकाय चुनाव में 284 सीटें जीती थी मगर इस बार 191 सीटों पर जीत मिली पाई है। आजाद प्रत्याशी भी साल 2021 में 364 सीटों पर जीते थे इस बार वे 251 सीटों पर सिमट गए हैं जबकि बसपा 5 सीटों से बढ़कर 7 सीटों पर पहुंची है। खैर, इन नतीजों पर मंथन के बाद सभी दल आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी-अपनी सियासी रणनीति को धार देने में जुटेंगे।