भगवंत मान सरकार ने किसानों की मांग मानते हुए लैंड पूलिंग पॉलिसी को वापस ले लिया है। मान सरकार की ओर से कहा गया है कि सरकार किसी भी योजना को किसानों की सहमति और भागीदारी के बिना लागू नहीं करेगी। यह केवल एक पॉलिसी वापसी नहीं, बल्कि किसानों के साथ विश्वास, सम्मान और साझेदारी के रिश्ते को और मजबूत करने का संकल्प है। किसान इस पॉलिसी का विरोध कर रहे थे। वहीं, लैंड पूलिंग को लेकर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।
प्रमुख सचिव ने जारी किया आदेश
आवास और शहरी विकास के प्रमुख सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी करके पॉलिसी को वापस लेने के संबंध में जानकारी दी है। पॉलिसी को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, जिसके बाद ही हाईकोर्ट ने कोर्ट ने 13 सिंतबर तक इस पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। पॉलिसी को लेकर सभी तरह के संशोधन, आदेश और पंजीकरण को वापस लेने का फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने पॉलिसी जारी करते हुए दावा किया था कि किसानों के कल्याण और अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए वह यह पॉलिसी लेकर आए हैं, लेकिन किसान संगठनों, विपक्ष और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने ही पॉलिसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके दवाब के चलते सरकार को यह पॉलिसी वापस लेनी पड़ी है।
पांच जून को जारी की गई थी पॉलिसी
पंजाब सरकार ने 5 जून को नई लैंड पूलिंग पॉलिसी 2025 जारी की थी। पॉलिसी के तहत किसान के एक एकड़ जमीन देने पर उसे हजार गज का रिहायशी और 200 गज का व्यवसायिक प्लॉट देने का प्रावधान किया गया था। इसी तरह एक कनाल जगह देने वाले किसान को 150 गज का रिहायशी प्लॉट, दो कनाल पर 300 गज, तीन कनाल पर 450 गज, चार कनाल पर 500 गज का प्लॉट देने का प्रावधान किया था। इसी तरह 9 एकड़ जमीन देने पर किसानों को तीन एकड़ जगह ग्रुप हाउसिंग के लिए देने की बात कही गई थी। 50 एकड़ जमीन देने पर 30 एकड़ जगह ग्रुप हाउसिंग, रेजिडेंशियल व कॉमर्शियल प्लॉट के लिए साइट देने का फैसला लिया गया था। पॉलिसी जारी करने के बाद ही इसका विरोध तेज हो गया था। इस कारण 21 जुलाई को पॉलिसी में संशोधन भी किया गया था।