प्रसवोत्तर रक्तस्राव मातृ मृत्यु का बड़ा कारण बनता जा रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान पंजाब में 8.46% महिलाओं को प्रसवोत्तर रक्तस्राव के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है। सूबे में प्रसवोत्तर रक्तस्राव के कारण मौतों का प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर से कम है लेकिन फिर भी स्थिति चिंताजनक है।
पड़ोसी राज्य की हरियाणा में स्थिति और भी गंभीर है। हरियाणा में वर्ष 2022-23 के दौरान प्रसवोत्तर रक्तस्राव के कारण मातृ मृत्यु का प्रतिशत 17.47% था जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 17.75% तक पहुंच गया। हालांकि वर्ष 2024-25 के दौरान मातृ मृत्यु का प्रतिशत मामूली कमी के साथ 12.46% दर्ज किया गया है।
राज्य सरकार ने प्रसव एएनएम व स्टाफ नर्स के 1,568 खाली पदों पर भर्ती करने का फैसला लिया है। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने इसे हाल ही में मंजूरी दी है। फिलहाल प्रसव एएनएम के 2,000 स्वीकृत पदों में से 729 और स्टाफ नर्सों के 1896 स्वीकृत पदों में से 839 पद भरे जाएंगे। इसी तरह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार भी प्रसवोत्तर रक्तस्राव से मातृ मृत्यु को रोकने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है जिसमें प्रसवोत्तर रक्तस्राव की रोकथाम के लिए स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। सभी अस्पतालों पर जरूरी दवाएं और प्रसवोत्तर रक्तस्राव से निपटने के लिए जरूरी उपकरण मुहैया करवाए जा रहे हैं।
प्रसवोत्तर रक्तस्राव से निपटने के लिए तय प्रोटोकॉल की सभी डॉक्टरों को पालना करनी चाहिए। गोल्डन आवर अहम होता है जिसमें मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है। रक्तस्राव को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाना जरूरी होता है। - मनीषा मैनी, स्त्री रोग विशेषज्ञ