चंडीगढ़ के बनने के बाद पहले मुख्य आयुक्त का पद हुआ करता था, लेकिन 3 जून 1984 को केंद्र सरकार ने मुख्य आयुक्त का पद समाप्त कर प्रशासक के सलाहकार का पद बनाया था। अब चार दशक बाद केंद्र ने सलाहकार का पद खत्म करते हुए इसे मुख्य सचिव के रूप में परिवर्तित कर दिया है।
चंडीगढ़ में प्रशासक के सलाहकार का पद समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले पर सियासत गरमा गई है। चंडीगढ़ में 40 साल बाद प्रशासक का पद समाप्त कर मुख्य सचिव का पद सृजित किया गया है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अकाली दल इसके विरोध में आ गए हैं।
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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता नील गर्ग ने चंडीगढ़ में सलाहकार का पद खत्म कर मुख्य सचिव का पद सृजित करने का कड़ा विरोध किया है। गर्ग ने कहा है कि वह इसके खिलाफ जरूरत पड़ी तो विधानसभा में भी प्रस्ताव लेकर आएंगे और इसे रद्द करके केंद्र को भेजेंगे। इसके अलावा सड़कों पर उतरकर इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किया जाएगा।
कंग बोले-चंडीगढ़ पर पंजाब सरकार से सलाह ले केंद्र
वहीं आप सांसद मालविंदर सिंह कंग ने चंडीगढ़ में अब एडवाइजर की जगह चीफ सेक्रेटरी का पद लागू किए जाने पर विरोध जताया है। सांसद कंग ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है। पंजाब के गांव को उजाड़ कर चंडीगढ़ शहर बसाया गया है। ऐसे में चंडीगढ़ से जुड़े किसी भी फैसले से पहले केंद्र सरकार को पंजाब सरकार से एक बार सलाह जरूर लेनी चाहिए लेकिन केंद्र सरकार की मंशा शुरू से यही रही है कि चंडीगढ़ पर से पंजाब का हिस्सा या हक खत्म किया जाए।
सुखबीर बादल ने की निंदा
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार के पद को चंडीगढ़ यूटी के मुख्य सचिव के रूप में पुनः नामित करने के निर्णय की कड़ी निंदा की है। सुखबीर ने कहा कि चंडीगढ़ पर पंजाब के उचित दावे को और कमजोर करने के लिए यह भारत सरकार का एक और भेदभावपूर्ण कदम है। मैं केंद्र से आग्रह करता हूँ कि वह देश की ताकत और अन्न भंडार को नुकसान न पहुंचाए क्योंकि इसके दीर्घकालिक परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। चंडीगढ़ और पंजाबी भाषी क्षेत्रों को पंजाब को हस्तांतरित करना और नदी के पानी पर हमारे तटीय अधिकार प्रदान करना आदि पंजाब के 1966 के पुनर्गठन का एकमात्र अधूरा एजेंडा है। मैं पंजाब के लोगों को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पंजाब विरोधी निर्णयों पर केंद्र के साथ मिलीभगत के खिलाफ भी आगाह करता हूं।