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तरनतारन में भी बरपा था जहरीली शराब का कहर: सत्ता में आने के बाद भी मान सरकार ने नहीं ली सुध, पीड़ित इंतजार में

Thu, 15 May 2025 03:16 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, तरनतारन (पंजाब)

सार

2020 में जिले के गांवों में एक-एक करके जहरीली शराब से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इनमें तरनतारन शहर के अलावा  पंडोरी गोला, कक्का कंडियाला, कलेर, मलमोहरी, मलिया, कद गिल आदि गांवों के लोग शामिल थे। 
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गांव कका कंडियाला निवासी पीड़ित परिवार के सदस्य - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जुलाई 2020 में तरनतारन जिले में जहरीली शराब पीने से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। जबकि करीब 12 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। उस समय पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार थी। तब विपक्ष की भूमिका निभा रही आम आदमी पार्टी ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। अब भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार तीन साल से अधिक समय पूरा कर चुकी है। लेकिन अभी तक इस सरकार ने पीड़ित परिवारों को नौकरी नहीं दी। 

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16 जुलाई 2020 को तरनतारन जिले के रटौल गांव में प्रकाश सिंह पाशी नामक व्यक्ति ने मटके से शराब बेची थी। इस जहरीली शराब ने तीन लोगों की जान ले ली थी और सेवानिवृत्त बीएसएफ कर्मचारी अरविंदर सिंह बिट्टू की आंखों की रोशनी भी चली गई थीं। उस समय पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया। गांव रटौल में हुई घटना के कुछ दिनों बाद तरनतारन जिले में जहरीली शराब का कहर बरपा। 

इस घटना को पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन भगवंत मान की सरकार की नींद अभी तक नहीं टूटी है। सरकार का वादा था कि पीड़ित परिवारों के एक एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। प्रदेश में सरकार भले ही 2022 में बदल गई मगर सरकारी जिम्मेदारी भगवान मान ने नहीं निभाई।

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नाैकरी तो दूर, वित्तीय सहायता भी नहीं मिली

गांव बचरे निवासी सिमरजीत कौर ने बताया कि उसके ससुर सविंदर सिंह की जहरीली शराब पीने से आंखों की रोशनी चली गई। सरकार ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। मुझे नौकरी तो दूर, घोषित वित्तीय सहायता भी नहीं मिली है। 

स्कूल में काम करके परिवार को पाल रहीं सरबजीत काैर

इसी गांव के गुरजीत सिंह की भी जहरीली शराब पीने से मौत हो गई। गुरजीत सिंह की पत्नी सरबजीत कौर स्कूल में सफाई का काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं।

सरकार ने नहीं दिया मुआवजा

गांव कका कंडियाला निवासी अमरजीत कौर ने बताया कि उसके पति की मौत जहरीली शराब के कारण हुई थी, लेकिन सरकार ने यह कहकर मुआवजा नहीं दिया कि उसके पति पर शराब बेचने के दो मामले दर्ज हैं। महिला अब अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रह रही है।

सभी आरोपी जमानत पर रिहा

उस समय कैप्टन सरकार ने जहरीली शराब मामले में एसआईटी गठित की थी। जिसके बाद 37 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पंजाब के विभिन्न जिलों के 60 लोगों के खिलाफ चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। हालांकि समय समय पर सभी आरोपियों को अदालत द्वारा जमानत दे दी गई। पुलिस  की और से पेश लिए चालान मुताबिक जहरीली शराब का मामला अभी स्थानीय अदालत में विचाराधीन है।

मंत्री भी आते हैं पेशी पर 

उस समय आम आदमी पार्टी ने जहरीली शराब से हुई मौतों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया था। कांग्रेस सरकार ने इस संबंध में मामले दर्ज किए। पुलिस द्वारा दर्ज मामले अब स्थानीय अदालत में लंबित हैं। पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, उपाध्यक्ष जय किशन सिंह रोड़ी, मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, हरभजन सिंह ईटीओ, विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा, कश्मीर सिंह सोहल, दलबीर सिंह तोग, मनजीत सिंह गियासपुर, कुलवंत सिंह पंडोरी और आम आदमी पार्टी के कई विधायक और नेता अदालत में तारीखों का सामना कर रहे हैं। लेकिन इन सत्ताधारी नेताओं ने अभी तक जहरीली शराब के शिकार हुए लोगों के परिवारों की सुध लेने की जरूरत नहीं समझी है।

लालपुरा ने मुख्यमंत्री से बातचीत का आश्वासन दिया

शराब से मरने वाले अधिकतर लोग खडूर साहिब विधानसभा क्षेत्र के थे। खडूर साहिब से आम आदमी पार्टी के विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा का कहना है कि पांच साल पहले हुई मौतों को लेकर आज भी गमगीन हो जाता हूं। अगर किसी परिवार को अभी मुआवजा नहीं मिला तो वह मेरे साथ संपर्क कर सकता है पीड़ित परिवारों को नौकरी देने के लिए मुख्यमंत्री से बात की जाएगी।
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