लाइन क्लियर करने के बहाने भागे
फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद उनके पिता ट्रेन लेकर पाकिस्तान के गंडा सिंह रेलवे स्टेशन को रवाना हुए। ट्रेन में सवार लोगों ने पाकिस्तानी रेल अधिकारियों से कहा कि गार्ड और ट्रेन पायलट ने उनके लोगों को मरवाया है। यह सुनकर दोनों को पकड़कर वहीं बैठा लिया था। अशोक कुमार ने बताया कि उनके पिता के मुताबिक कुछ देर बाद अनाउंसमेंट हुई कि उक्त रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पहुंच रही है। लाइन पर फिरोजपुर से गई ट्रेन खड़ी थी। लाइन क्लियर करने के लिए वहां पर कोई गार्ड व ट्रेन पायलट नहीं था। उन्हें ही लाइन क्लियर करने को कहा गया। उनके पास बचने के लिए इससे अच्छा मौका नहीं था। उन्होंने ट्रेन की रफ्तार तेज कर सीधा फिरोजपुर शहर रेलवे स्टेशन आकर रोकी।
सेना की टुकड़ी के साथ दोबारा गए थे पाकिस्तान
यहां पहुंचने पर अधिकारियों ने पूछा कि ट्रेन में हिंदुस्तानियों और सिखों को आना था, वे कहां हैं तो उनके पिता ने आपबीती सुनाईं। इसके बाद फिरोजपुर के रेल अधिकारियों ने ट्रेन में सेना की एक टुकड़ी के साथ फिर उनके पिता और ट्रेन पायलट को कसूर रेलवे स्टेशन भेजा। वे वहां से हिंदू व सिखों को ट्रेन से फिरोजपुर ला रहे थे कि पाकिस्तान के गंडा सिंह के पास मुसलमानों ने हमला कर दिया। ट्रेन के ऊपर और अंदर खचाखच लोग भरे हुए थे। हमले में बहुत लोग मारे गए। किसी तरह ट्रेन की रफ्तार बढ़ा कर सैकड़ों लोगों की जान बचाई। ये बातें उनके पिता बाल कृष्ण उन्हें अक्सर बताया करते थे।
1945 में गार्ड के पद पर हुई थी नियुक्ति
बाल कृष्ण की 25 अप्रैल 1945 में रेलवे में ट्रेन गार्ड के पद पर नियुक्ति हुई थी। 1947 में ट्रेन लेकर पाकिस्तान गए थे और वहां से लाशों से भरी ट्रेन लेकर फिरोजपुर आए थे। वर्ष 1965 तक गार्ड की नौकरी की। 31 मई 1984 को रेलवे से चीफ कंट्रोलर पद से सेवानिवृत्त हुए। आठ सितंबर 2019 को बाल कृष्ण का निधन हो गया।