पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) पंजाब में थानों पर ग्रेनेड हमले के फर्जी वीडियो बनवाकर उन्हें वायरल कर रही है। इसमें पाकिस्तानी आर्मी के अफसर भी आईएसआई का सहयोग कर रहे हैं।
पंजाब पुलिस ने अपनी एक खास रणनीति के तहत बॉर्डर से आठ किलोमीटर पहले सीसीटीवी नाके लगाने की योजना बनाई है। रात को जब सीमा पर ड्रोन ड्रॉपिंग के जरिये हथियार और नशीले पदार्थों की खेप गिराई जाती है तो सीमावर्ती गांवों के स्थानीय तस्कर पैदल व अपने वाहनों से आधी रात को खेप उठाने पहुंचते हैं। पुलिस ने 585 ऐसी जगहें चिह्नित की हैं जहां 2367 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। पुलिस की यह तीसरी आंख ऐसे लोगों की मूवमेंट पर पैनी नजर रखेगी।
पंजाब पुलिस ने सीमा पर तीन एंटी ड्रोन सिस्टम इंस्टॉल किए हैं जबकि छह और लगाने की तैयारी है। इस करीब 175 करोड़ की लागत आएगी। उधर भारत की तकनीकी तैयारियों के खिलाफ पाकिस्तान भी अपनी तकनीक अपग्रेड कर रहा है। इसके लिए पाकिस्तान अब रिटर्न टू होम तकनीक में माहिर छोटे ड्रोनों का सहारा ले रहा है। पंजाब पुलिस मानती है कि ऐसे ड्रोन हमारी तकनीक को बीट कर रिटर्न टू होम हो रहे हैं यानी काम को अंजाम दे पाकिस्तान लौट रहे हैं। भले ही इनका पेलोड कम रहता है मगर ये आसानी से रडार में नहीं आ रहे हैं।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारी सबसे ज्यादा थानों पर ग्रेनेड हमलों के फर्जी वीडियो बनवाकर पंजाब के लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वे यह दिखाना चाहते हैं कि पंजाब की शांति भंग हो रही है और बहुत कुछ गड़बड़ चल रहा है। हम उनकी हर साजिश का कड़ा जवाब दे रहे हैं। - गौरव यादव, डीजीपी, पंजाब