पंजाब के बॉर्डर पर ड्रोन हमलों के धमाकों की गूंज थम गई है। गांव छोड़ कर गए गए लोग लौटने लगे हैं, लेकिन उन्हें अब भी एक चिंता सता रही है कि वे करीब 45000 एकड़ जमीन पर धान की रोपाई कर पाएंगे या नहीं।
संघर्षविराम के बाद बॉर्डर एरिया में हालात बदलने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि अप्रैल में गेहूं की कटाई के बाद जून-जुलाई में धान की रोपाई होती है। वहीं, बहुत से किसान सब्जियां भी उगाते हैं। पंजाब की 553 किलोमीटर की सीमा पाकिस्तान से लगती है। अब उम्मीद है कि दो-चार दिनों में किसानों को उनकी जमीन में जाने की छूट दे दी जाएगी।
गांव थोबा के रहने वाले सुरजीत सिंह का कहना है कि संघर्ष विराम होने से वह अब अपनी जमीन पर खेती कर पाएंगे। आने वाले दिनों में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, पाकिस्तान को सबक सिखाना भी बहुत जरूरी था। इसी गांव के बलबीर सिंह का कहना है कि यह वक्त धान की पनीरी तैयार करने का है। मगर तनाव के चलते हम जमीन में नहीं जा पा रहे थे। अब उम्मीद है कि जल्द काम शुरू होगा। धीरे-धीरे सब ठीक हो रहा है। इससे सभी किसान काफी खुश हैं।
अमृतसर के डीसी साक्षी साहनी का कहना है कि अभी तक बीएसएफ या सेना की तरफ से कोई निर्देश नहीं मिले हैं, जैसे ही निर्देश मिलेंगे, किसानों को खेतों में काम करने की अनुमति दे दी जाएगी।