गुरु नानक देव जी ने यहां बिताए थे 18 साल
करतारपुर कॉरिडोर केवल एक रास्ता नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर में बिताए थे। इसी स्थान पर उन्होंने खेती करते हुए नाम जपो किरत करो वंड छको का संदेश दिया था।
1947 के विभाजन के बाद यह पवित्र स्थल पाकिस्तान में चला गया था। लंबे समय तक भारतीय श्रद्धालु सीमा पर खड़े होकर दूरबीन से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन करते थे। 2019 में कॉरिडोर खुलने के बाद श्रद्धालुओं को सीधे वहां जाकर मत्था टेकने का अवसर मिला।
फिलहाल कॉरिडोर बंद होने से लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी होने के बावजूद आवाजाही ठप है और सभी की नजरें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।
कॉरिडोर बंद, श्रद्धालु दूर से ही कर रहे दर्शन
मंगलवार को डेरा बाबा नानक पहुंचे पटियाला के एक परिवार ने बताया कि वे नियमित रूप से करतारपुर साहिब में माथा टेकने जाया करते थे। कॉरिडोर बंद होने के बाद अब उन्हें डेरा बाबा नानक से ही दूर से दर्शन करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। परिवार ने दोनों देशों की सरकारों से अपील की कि आपसी वार्ता कर जल्द कॉरिडोर को फिर से खोला जाए ताकि संगत सीधे गुरुद्वारा साहिब में जाकर दर्शन कर सके।