इस तरह दोनों जिलों में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। आयोग ने इससे पहले 9 और 10 अक्तूबर को दोनों जिलों का दौरा कर पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त निगरानी के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मामलों में वृद्धि ने अधिकारियों की निगरानी और आदेशों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि अधिनियम की धारा-14 के तहत आदेशों का पालन न करने पर पांच वर्ष तक की कैद या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।
ड्रोन से निगरानी और एक्शन प्लान लागू करने पर जोर
आयोग ने कहा है कि पराली जलाने की कुछ घटनाएं निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के तहत दर्ज नहीं हो पातीं। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आयोग लगातार ड्रोन से निगरानी बढ़ाने, कम लागत वाले सेंसर लगाने और एक्शन प्लान को सख्ती से लागू करने पर जोर देता रहा है। आयोग की टीमें प्रदेश के हॉटस्पॉट गांवों का दौरा भी कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। दोनों जिलों के हालिया दौरे के दौरान भी अधिकारियों को निगरानी सख्त करने के निर्देश दिए गए थे।