पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उन्होंने जोर शोर के साथ पंजाब का पक्ष रखा है लेकिन सभी राज्य हाथ धोकर पंजाब के पीछे पड़ गए हैं। पंजाब का हक जानने के बाद पानी संबंधित 11 मुद्दे गृह मंत्रालय ने स्थगित कर दिए हैं और इनमें यथास्थिति बनाने के निर्देश दिए हैं। मान मंगलवार को दिल्ली में प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सीनेट चुनाव करवाने पर भी गृह मंत्रालय ने सहमति जताई है। साथ ही हरियाणा की दावेदारी का जमकर विरोध किया है। मान ने कहा कि हम चंडीगढ़ का मुद्दा उठाते, उससे पहले ही हिमाचल ने चंडीगढ़ में अपनी हिस्सेदारी की बात कह दी और साथ ही शानन प्रोजेक्ट भी मांग लिया लेकिन किसी भी कीमत पर हम पंजाब के अधिकारों पर डाका नहीं पड़ने देंगे।
इसी तरह राजस्थान फिरोजपुर और हरि के पत्तन हेडवर्क्स देने की मांग कर रहा है। साथ ही हरियाणा सतलुज यमुना लिंक जल्द बनाने की मांग कर रहा है। हमने कहा कि हमारे पास पानी नहीं है। इसी तरह पीयू से अंबाला और कुरुक्षेत्र के कॉलेजों को पीयू से एफलिएशन देने की मांग कर रहे हैं। मान ने कहा कि पुरानी बातें कर रहे है जबकि मौजूदा स्थिति के हिसाब से पानी पर फैसला लिया जाना चाहिए। मान ने कहा कि किसी भी कीमत पर पंजाब के अधिकारों पर कब्जा नहीं करने देंगे। बैठक में सभी मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है कि धक्केशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी तरह चंडीगढ़ में 60:40 के रेशों के तहत अधिकारियों की तैनाती का प्रस्ताव स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया है।