दूसरे देशों को निर्यात बढ़ाने व तैयारी में पंजाब की स्थिति में पहले से सुधार हुआ है। सूबा ओवरऑल 58.32 स्कोर के साथ सातवें नंबर पर गया है जबकि वर्ष 2022 की रिपोर्ट में प्रदेश दसवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड पंजाब से एक साल के अंदर 56 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है।
सबसे अधिक चावल, ट्रैक्टर, सूती धागा व मोटर वाहन के पुर्जे का निर्यात किया जा रहा है। इसके लिए अमेरिका, यूएई, बांग्लादेश, सऊदी अरब व यूके प्रमुख मार्केट हैं। नीति आयोग की तरफ से जारी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। पंजाब के पांच शहर निर्यात का प्रमुख केंद्र हैं जिनमें अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, मोहाली और पटियाला शामिल हैं।
अमृतसर से कपड़ा, लुधियाना से साइकिल, ऑटो पार्ट्स और कपड़ा, जालंधर से खेल उपकरण, लाइट इंजीनियरिंग से जुड़ा सामान, मोहाली से दवाएं और पटियाला से इंजीनियरिंग सामान का निर्यात होता है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका को वर्ष 2024 के दौरान सबसे अधिक पंजाब से 15.52% निर्यात हुआ है जबकि दूसरे नंबर पर यूएई को 7.35% का निर्यात हुआ है।
इसी तरह बांग्लादेश को 5.87%, सऊदी अरब को 5.85% और यूके को 5.63% का निर्यात किया गया है। पंजाब की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है लेकिन औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों का योगदान भी लगातार बढ़ रहा है। पंजाब ने साल में भारत के कुल गेहूं उत्पादन में 46.3% और चावल उत्पादन में 31.2% का योगदान दिया है।
7005 करोड़ के चावल का निर्यात
पंजाब में सबसे अधिक चावल का निर्यात हो रहा है जबकि उसके बाद ट्रैक्टर व बाकी सामान का निर्यात होता है। टॉप 10 में ये उत्पाद शामिल हैं।
उत्पाद राशि करोड़ों में
चावल 7,005
ट्रैक्टर 2,902
सूती धागा 2,792
मोटर वाहन पुर्जे 2,783
लोहे/स्टील की प्लेटें, रॉड 2,481
एंटीबायोटिक्स 1,773
लोहे/स्टील के स्क्रू, बोल्ट 1,496
मवेशियों का मांस 1,143
लिनन 1,075
ऑर्गेनिक कंपाउंड्स 766
यह है सूबे की ताकत
पंजाब भारत के सबसे मजबूत कृषि आधारों में से एक है जिसे जल संसाधनों और चावल, मक्का और गन्ना जैसी फसलों की बड़े पैमाने पर खेती का समर्थन प्राप्त है। राज्य की बासमती चावल, फार्मास्यूटिकल्स, खेल के सामान और इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति संतुलित और मजबूत निर्यात वृद्धि में योगदान करती है। राज्य में 14.65 लाख एमएसएमई हैं जो राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
निर्यात बढ़ाने में बाधा बनती यह कमजोरियां
सीमित अनुसंधान एवं विकास और नवाचार बड़े पैमाने पर पंजाब के निर्यात तंत्र को प्रभावित करता है। सूबे की भौगोलिक स्थिति के कारण दूरस्थ बंदरगाहों पर निर्भरता बढ़ जाती है जिससे रसद लागत और माल पहुंचने में लगने वाला समय बढ़ जाता है। इसके अलावा कई लघु एवं मध्यम उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्राप्त करने और अनुपालन मानकों का पालन करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जहां उच्च लागत वैश्विक बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धा को और सीमित कर देती है।
राज्य के लिए बड़ा खतरा
पंजाब के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को सीमा पार तनावों से बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है जो व्यापार मार्गों को बाधित कर सकते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा वियतनाम जैसे कम लागत वाले विनिर्माण केंद्रों से उभरती प्रतिस्पर्धा पंजाब के पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों जैसे वस्त्र और कृषि-प्रसंस्करण के लिए एक चुनौती पेश करती है।