डॉ. कुसुम शर्मा को मिला विमेन इन मेडिसिन अवॉर्ड
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पीजीआई चंडीगढ़ के मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर और एक्स्ट्रा पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस (ईपीटीबी) की नोडल अधिकारी डॉ. कुसुम शर्मा को चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस) के प्रतिष्ठित ‘विमेन इन मेडिसिन अवार्ड-2026’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान 10 अक्तूबर को तमिलनाडु स्थित एसआरएम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित एनएएमएसकॉन-2026 के दीक्षांत समारोह में प्रदान किया गया।
डॉ. कुसुम शर्मा पिछले करीब दो दशक से एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी की जांच से जुड़ी जटिल चुनौतियों को दूर करने के लिए काम कर रही हैं। यह टीबी फेफड़ों के बजाय शरीर के दूसरे अंगों, जैसे मस्तिष्क, आंखों, पेट और हड्डियों को प्रभावित करती है। इसकी पहचान करना अक्सर मुश्किल होता है, क्योंकि प्रभावित अंगों से लिए गए नमूनों में टीबी के बैक्टीरिया की मात्रा बहुत कम हो सकती है। ऐसे में बीमारी की पुष्टि में देरी होती है और मरीज का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता।
जटिल टीबी की पहचान के लिए विकसित की जांच तकनीक
डॉ. शर्मा के नेतृत्व में उनकी टीम ने बीमारी की पहचान कम समय में और अधिक सटीक तरीके से करने के लिए जांच तकनीक विकसित करने पर काम किया। उनकी टीम ने मल्टीप्लेक्स पीसीआर जांच विकसित की, जिसे पेटेंट भी मिला है। यह तकनीक मस्तिष्क, आंखों और आंतों से जुड़ी टीबी के मामलों में बैक्टीरिया के डीएनए का पता लगाने में मदद करती है। इस तकनीक का अमेरिका की जैक्सनविल स्टेट लेबोरेटरी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्यापन भी किया गया।