पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लगातार जमानत याचिकाएं दायर करने की प्रवृत्ति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों में कोई ठोस बदलाव नहीं था। इसके बावजूद बार-बार जमानत मांगना फोरम शॉपिंग की श्रेणी में आ सकता है। फोरम शॉपिंग का अर्थ है अपनी मांग के पक्ष में अनुकूल आदेश हासिल करने के लिए अलग-अलग अदालतों या पीठों का रुख करना। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल एक ही राहत के लिए बार-बार नहीं किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता मॉरिसन लॉयल उर्फ मॉरिसन उर्फ निशु पर एक महिला की निजी तस्वीरें और वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित करने का आरोप है। याचिकाकर्ता ने अग्रिम जमानत की मांग करते हुए दावा किया कि उसे पड़ोसियों के साथ विवाद के कारण झूठा फंसाया गया है। उसने यह भी दलील दी कि पहले की जांच में उसके खिलाफ कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला था। संबंधित मोबाइल नंबर भी उसका नहीं होने की बात कही गई।
हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। उसकी पहली याचिका 1 अक्तूबर 2026 को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दी गई थी। इसके बाद दूसरी याचिका में उसने दलील दी कि पहली सुनवाई के दौरान वह जांच अधिकारी की बात का जवाब नहीं दे पाया था। हालांकि, अदालत ने इसे परिस्थितियों में कोई ठोस बदलाव नहीं माना।