देश का सबसे सुनियोजित शहर चंडीगढ़ आज अपनी तय क्षमता से कई गुना अधिक आबादी का दबाव झेल रहा है। जिस चंडीगढ़ को करीब पांच से छह लाख लोगों की आबादी के लिए बसाया गया था, वहां अब स्थायी आबादी 12 लाख के करीब पहुंच चुकी है।
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट में बड़े बदलाव प्रस्तावित किए हैं। योजना के तहत चुनिंदा क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने, मिक्स्ड लैंड यूज को बढ़ावा देने, हाईराइज भवनों के निर्माण और पुनर्विकास की नीति लागू करने की तैयारी है। प्रशासन का मानना है कि दक्षिणी सेक्टरों में हाईराइज भवनों के जरिए बढ़ती आबादी को समायोजित किया जा सकेगा। वहीं सेक्टर-1 से 30 तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा हेरिटेज क्षेत्र घोषित होने के कारण वहां किसी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव संभव नहीं है।
हालांकि इन प्रस्तावों का विरोध भी शुरू हो गया है। क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी और आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि केवल ऊंची इमारतें बनाना समाधान नहीं होगा। सड़क, पार्किंग, पेयजल, सीवरेज और अन्य शहरी बुनियादी ढांचे का समान गति से विस्तार किए बिना बढ़ती आबादी की चुनौती से नहीं निपटा जा सकता।