जोगिंदर सिंह उगराहां ने इस पर कहा कि मोर्चे की तरफ से यह कहा जा रहा है कि उनके साथ विचार विमर्श के बिना यह बैठक रखी गई है, जबकि उन्होंने दो बार मोर्चे को पत्र लिखा और बैठक में आने का निमंत्रण दिया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार को चंडीगढ़ के किसान भवन में बैठक बुलाई थी। किसान मजदूर मोर्चा इस बैठक में नहीं पहुंचा है, जिसके चलते किसानों के एकजुटता के प्रयासों को झटका लगा है।
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इस बैठक में किसान मजदूर मोर्चा के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया, जिसमें सरवण सिंह पंधेर शामिल थे। हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक इस बैठक में शामिल नहीं हुआ।
बैठक में किसान यूनियनों द्वारा किसानों और मजदूरों की मांगों को लेकर एक संयुक्त संघर्ष शुरू करने पर चर्चा की गई। लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक की अनुपस्थिति के कारण कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।
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अब किसान मजदूर मोर्चा द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक के नेताओं के साथ बातचीत की जाएगी और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि वे जल्द ही एक और बैठक बुलाएंगे, जिसमें कोई निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही पंजाब सरकार से मांग की गई कि वे केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नए खेती मंडीकरण नीति के मसौदे के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करे।
इस अवसर पर बलबीर सिंह राजेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, सरवण सिंह पंधेर, लखविंदर सिंह लखोवाल सहित बड़ी संख्या में किसान नेता मौजूद रहे। इस दौरान किसान नेताओं ने पंजाब सरकार द्वारा पंजाब में खून के रिश्तों में जायदाद ट्रांसफर कराने स्टैम्प ड्यूटी लगाने का विरोध किया।
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने इस पर कहा कि मोर्चे की तरफ से यह कहा जा रहा है कि उनके साथ विचार विमर्श के बिना यह बैठक रखी गई है, जबकि उन्होंने दो बार मोर्चे को पत्र लिखा और बैठक में आने का निमंत्रण दिया गया। लेकिन बावजूद इसके किसान मजदूर मोर्चे के नेताओं का बैठक में न आना अफसोसजनक है। अब हमारी तीनों किसान यूनियनें आपस में एकता के लिए बैठक कर रही है।