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झोटा हत्याकांड: एक्शन कमेटी की मांग पर लक्खा और शेरो नाभा जेल से रिहा, कब होगा परविंदर का अंतिम संस्कार?

Thu, 05 Nov 2026 08:17 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, मानसा (पंजाब)

सार

झोटा हत्याकांड के मामले में एक्शन कमेटी की एक और मांग पूरी हो गई है। 
इरादत्न हत्या के मामले में गिरफ्तार लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो को नाभा जेल से रिहा कर दिया गया है। 
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लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो जेल से रिहा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर चल रहा धरना 24वें दिन भी जारी रहा। इस बीच इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो को नाभा जेल से रिहा कर दिया गया। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बुधवार देर रात तक झोटा के परिवार और इंसाफ कमेटी के साथ बैठक की। इसमें उनकी मांगें मानने, दर्ज मामले रद्द करने और गिरफ्तार युवकों को छोड़ने का भरोसा दिया गया।

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इंसाफ कमेटी और परिवार के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि जब तक इरादतन हत्या के मामले में नामजद अज्ञात व्यक्तियों सहित अन्य गिरफ्तार युवकों को रिहा नहीं किया जाता और दर्ज मामलों की कैंसिलेशन रिपोर्ट नहीं मिलती, तब तक झोटा का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

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इंसाफ कमेटी के सदस्य झोटा के पिता भीम सिंह, मानिक गोयल और कामरेड राजविंद्र राणा ने कहा कि सरकार के भरोसे के अनुसार लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो को रिहा कर दिया गया है। उनके खिलाफ दर्ज केस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। भम्मे कलां मामले में दर्ज इरादतन कत्ल के केस में अन्य युवकों की रिहाई की भी उम्मीद है। 

पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की जताई संभावना 
उन्होंने एक-दो दिन में पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार होने की संभावना जताई। कमेटी ने कहा कि रिहा हुए दोनों नेताओं और पुलिस द्वारा पकड़े गए अन्य नौजवानों के धरने में पहुंचने के बाद बैठक कर आगे का फैसला लिया जाएगा। झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा कि उन्होंने इंसाफ की लड़ाई की जिम्मेदारी कमेटी को सौंपी थी। कमेटी ने सरकार के साथ बातचीत में जो फैसला किया है, वह उन्हें मंजूर है। उन्होंने समझौता किसी लालच में करने के आरोपों को भी नकारा।

उधर, मानसा के तीनकोनी चौक पर 24वें दिन भी धरना जारी रहा। अकाली नेता जसकरण सिंह काहन सिंह वाला और मानिक गोयल ने कहा कि भीम सिंह ने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया है। उन पर धरना बेचने या लालच में समझौता करने के आरोप नहीं लगाने चाहिए। लक्खा सिधाना के वकील हरपाल सिंह खारा ने बताया कि अदालत ने लक्खा सिधाना और मोहनजीत शेरो के रिलीज वारंट जारी कर दिए हैं और अदालत ने केस रद्द कर दिया है।
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