फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट: पंजाब में 12 प्रतिशत लोग पानी की गुणवत्ता से असंतुष्ट, सरकार के सामने चुनाैती

Mon, 13 Jan 2025 02:43 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जल मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। मंत्रालय की तरफ से हाल ही में एक सवाल के जवाब में लोकसभा में यह रिपोर्ट पेश की गई थी। इसी तरह रिपोर्ट में फिरोजपुर फीडर नहर के पानी की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई है, क्योंकि इसमें बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर तय मानकों से अधिक पाया गया है।
विज्ञापन
water - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब में राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत सभी घरों में नल से पानी की आपूर्ति का लक्ष्य तो पूरा कर लिया है, लेकिन अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी की गुणवत्ता व नियमितता को लेकर है। प्रदेश में 12 प्रतिशत लोग पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं, यानि वे इसमें सुधार चाहते हैं।

विज्ञापन


इसी तरह 11 प्रतिशत लोगों ने पानी की नियमितता को लेकर भी असंतुष्टि जताई है। जल मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। मंत्रालय की तरफ से हाल ही में एक सवाल के जवाब में लोकसभा में यह रिपोर्ट पेश की गई थी। इसी तरह रिपोर्ट में फिरोजपुर फीडर नहर के पानी की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई है, क्योंकि इसमें बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर तय मानकों से अधिक पाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की घोषणा की थी, जिसका मकसद 19.35 करोड़ ग्रामीण परिवारों के घरों को नल से पानी की आपूर्ति की सुविधा देना था। इसके चलते प्रदेश में 34,26,808 घरों में यह सुविधा दी गई है। केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी सोमन्ना की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश में 89 प्रतिशत लोग पानी की नियमित रूप से आपूर्ति (नियमितता पैरामीटर) से संतुष्ट हैं, जबकि 88 प्रतिशत लोग पानी की गुणवत्ता क्वालिटी (पैरामीटर) से संतुष्ट हैं। यह पंजाब सरकार के लिए राहत की बात है कि राष्ट्रीय प्रतिशत के मुकाबले प्रदेश की स्थिति बेहतर है।
विज्ञापन


राष्ट्रीय स्तर पर पानी की नियमितता का 83 और गुणवत्ता का प्रतिशत 82 प्रतिशत है। हालांकि पंजाब के मुकाबले अन्य राज्यों में स्थिति काफी बेहतर भी है। यही कारण है कि राज्य सरकार के सामने इसमें सुधार करने की प्रमुख चुनौती है।

विज्ञापन

प्रदेश को इस वित्तीय वर्ष में मिला 644 करोड़ रुपये फंड 

केंद्र सरकार की तरफ से जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2024-25 के लिए पंजाब सरकार को 644 करोड़ रुपये फंड आवंटित किया गया है, जो वर्ष 2023-24 के मुकाबले अधिक है। पिछले वित्तीय वर्ष में केंद्र ने 479 करोड़ आवंटित किए थे। इसी तरह वर्ष 2022-23 में सबसे अधिक 2403 करोड़ जारी किए थे। पानी की गुणवत्ता व नियमितता में सुधार के लिए ही केंद्र की तरफ से सभी राज्यों को यह फंड जारी किया जाता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लिए थे सैंपल 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलकर फिरोजपुर फीडर नहर के सैंपल लिए थे, जिसमें सामने आया था कि इस नहर के पानी की गुणवत्ता जल गुणवत्ता मापदंड के तहत तय क्लास के अनुसार सही नहीं पाई गई।

पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर तय मानकों से अधिक 5 एमजी/एल पाया गया था, जबकि यह 3 एमजी/एल या उससे कम होना चाहिए। वहीं इंदिरा गांधी नहर के पानी की गुणवत्ता सही पाई गई थी।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार पंजाब के शहरों और कस्बों से निकलने वाले बिना ट्रीट सीवरेज के पानी और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण सतलुज नदी के पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है, जिनमें लुधियाना (बुड्डा नाले ड्रेन), जालंधर और फगवाड़ा (पूर्वी बेन ड्रेन) शामिल हैं। सीपीसीबी सतलुज नदी, ब्यास नदी, राजस्थान नहर, बुड्डा नाला और पूर्वी बेन नाले के जल गुणवत्ता की नियमित रूप से निगरानी करता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें