उत्तर भारत को मिलेगी नई संजीवनी
विशेषकर इस समझौते के खत्म होने से पंजाब को रावी के माध्यम से 10 हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलेगा। यह उत्तर भारत के लिए नई संजीवनी साबित हो सकता है खासकर तब जब पंजाब जैसे राज्य भूजल संकट से जूझ रहे हैं। पंजाब के पूर्व आईएएस अधिकारी काहन सिंह पन्नू ने बताया कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय से ही पाकिस्तान में जा रहे ज्यादा पानी का मुद्दा उठता आया है। जम्मू-कश्मीर में बहने वाली चिनाब नदी से एक बड़ी नहर निकालकर उसका पानी पंजाब को देने की बात हुई थी।
पंजाब के तत्कालीन नहरी विभाग के चीफ इंजीनियर ने 1955 में इस योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की थी, जिससे पंजाब को 10 हजार क्यूसेक पानी मिलने का रास्ता बनाया गया था, लेकिन कराची में 19 सितंबर, 1960 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुए सिंधु जल समझौता होने से यह परियोजना अधर में रह गई। पूर्व आईएएस और जल विवादों के विशेषज्ञ के तौर पहचान रखने वाले काहन सिंह पन्नू ने कहा कि इस समझौते के रद्द होने का सीधा लाभ पंजाब को पहुंचेगा।