40 वर्षीय विक्रमजीत की 15 अक्तूबर को माड़ी पन्नवां गांव में धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि नशीले पदार्थों की बिक्री का विरोध करने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को पंजाब दौरे पर पहुंचे। सबसे पहले शाह गुरदासपुर जिले के माड़ी पन्नवां गांव में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले मृतक विक्रमजीत सिंह के परिवार से मिले।
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करीब 15 मिनट तक परिवार के साथ रहे शाह ने उनकी बात सुनी और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। परिवार के मुताबिक, गृह मंत्री ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने, आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन भी दिया।
मां के पैर छुए
मुलाकात के दौरान भावुक पल उस समय देखने को मिला, जब अमित शाह ने विक्रमजीत सिंह की मां सुरजीत कौर के पैर छूकर उन्हें ढांढस बंधाया। परिवार ने गृह मंत्री को मांगपत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
परिवार की ओर से बताया गया कि अमित शाह ने मांगपत्र स्वयं पढ़ा और उसे अपने साथ ले गए। विक्रमजीत की बहन ने मुलाकात के बाद कहा कि गृह मंत्री ने परिवार के सदस्यों से विस्तार से बातचीत की और उनकी मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया। परिवार ने उम्मीद जताई कि सीबीआई जांच से मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को सजा मिल सकेगी।
15 अक्तूबर को हुई थी बिक्रमजीत की हत्या
बताया जाता है कि 40 वर्षीय विक्रमजीत सिंह की 15 अक्तूबर को माड़ी पन्नवां गांव में धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि नशीले पदार्थों की बिक्री का विरोध करने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया, हालांकि पुलिस के जरिए दिए गए ब्यानों में प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि लड़ाई मोटरसाइकिल को लेकर हुई थी, परन्तु वह आरोपी नशे के धंधे में लिप्त थे। इस घटना के बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। गृह मंत्रालय ने पंजाब में नशे से जुड़े तीन हालिया मौतों के मामलों पर राज्य सरकार से रिपोर्ट भी मांगी थी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, प्रदर्शनकारियों को रोका
अमित शाह के दौरे के मद्देनजर पुलिस प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। कुछ किसान संगठनों ने गृह मंत्री के दौरे का विरोध करते हुए प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रदर्शनकारी उनसे मुलाकात स्थल तक नहीं पहुंच सके।
पंजाब के डीजीपी एम.एफ. फारूकी के अनुसार, दौरे के लिए करीब 1,200 से 1,300 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। पुलिस ने मुलाकात स्थल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई थी, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
नशे का मुद्दा बना राजनीतिक बहस का केंद्र
पंजाब में नशे की समस्या और इससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की हत्याओं और राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, अमित शाह का प्रभावित परिवारों से मिलना इस मुद्दे पर केंद्र की राजनीतिक पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है।
विक्रमजीत सिंह के परिवार को अब सीबीआई जांच के जरिए न्याय मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जांच, आर्थिक सहायता और नौकरी को लेकर गृह मंत्री की ओर से दिए गए आश्वासनों के संबंध में आगे की आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार रहेगा।