पिता को कनाडा की अदालत ने मात्र 2 से 3 हफ्तों के लिए बच्चे के साथ भारत आने की अनुमति दी थी, जो कुछ शर्तों के साथ थी। पिता ने इन शर्तों का उल्लंघन करते हुए न केवल कनाडा वापसी से इन्कार किया बल्कि भारत सरकार से वीजा विस्तार भी हासिल कर लिया।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कैनेडियन महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा व पंजाब के डीजीपी को आदेश दिया है कि वह हर हाल में याची के पति व बच्चे को अदालत में पेश करें।
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा करने में विफल रहने पर दोनों डीजीपी को वीसी के जरिए हाजिर होना होगा। पिता पर आरोप है कि उसने कनाडा की अदालत के आदेश का उल्लंघन करते हुए बच्चे को भारत (मोहाली) में जबरन रोके रखा।
सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया था कि भले ही पिता का चरित्र निष्कलंक हो और वह बच्चे की देखभाल के लिए पूरी तरह से सक्षम हो और भले ही मां से बिना किसी उचित कारण के उसका अलगाव हुआ हो, लेकिन फिर भी बच्चे के कल्याण की दृष्टि से उसकी कस्टडी मां के पास होना ही अधिक उपयुक्त होगा। खासकर तब, जब बच्चा बहुत ही नाजुक उम्र में हो या उसकी सेहत नाजुक हो, तो मां की स्वाभाविक देखभाल और भावनात्मक लगाव की तुलना किसी भी वैकल्पिक देखभाल से नहीं की जा सकती।
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मां ने अदालत को बताया था कि पिता को कनाडा की अदालत ने मात्र 2 से 3 हफ्तों के लिए बच्चे के साथ भारत आने की अनुमति दी थी, जो कुछ शर्तों के साथ थी। पिता ने इन शर्तों का उल्लंघन करते हुए न केवल कनाडा वापसी से इन्कार किया बल्कि भारत सरकार से वीजा विस्तार भी हासिल कर लिया, जबकि उसने कनाडा की अदालत के उस आदेश को छुपा लिया जिसमें मां को बच्चे की संपूर्ण कस्टडी और निर्णय लेने का अधिकार सौंपा गया था।
सिंगल बेंच ने आदेश दिया था कि बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी जाए। इसके बाद याची का पति बच्चे के साथ गायब हो गया। आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने इसे आदेश का अपमान मानते हुए अब हरियाणा व पंजाब के डीजीपी को हर हाल में मंगलवार को बच्चे को पिता के साथ कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।