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एलपीयू हिंसा मामला: जांच पर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब सरकार को 72 घंटे में रिपोर्ट केंद्र को सौंपने के आदेश

Wed, 04 Nov 2026 08:48 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 72 घंटे में रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार को रिपोर्ट प्राप्त होने के सात दिन के भीतर एनआईए से जांच करवाने के संबंध में निर्णय लेने को कहा गया है। 
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 72 घंटे में मामले से संबंधित रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही, केंद्र सरकार को रिपोर्ट मिलने के सात दिन में एनआईए जांच पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।

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मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने बुधवार को ये निर्देश जारी किए। यह मामला पंजाब के जालंधर जिले में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से संबंधित है। विश्वविद्यालय के छात्र रवि राज ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से करवाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के संज्ञान में आया कि पंजाब पुलिस ने इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66एफ के तहत अपराध दर्ज किया है। यह धारा साइबर आतंकवाद से संबंधित अपराधों में लगाई जाती है। अदालत ने इस पहलू को गंभीरता से लिया। इसके कानूनी प्रभाव पर भी ध्यान दिलाया।

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कानूनी प्रक्रिया पर सवाल 
दरअसल, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66एफ के तहत दर्ज अपराध एनआईए अधिनियम की अनुसूची में शामिल है। ऐसे मामलों में निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके तहत राज्य सरकार को केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजनी होती है। इसके बाद केंद्र सरकार यह तय करती है कि मामले की जांच एनआईए को सौंपी जाए या नहीं।

केंद्र सरकार को निर्देश 
हाईकोर्ट ने इसी वैधानिक प्रक्रिया के तहत पंजाब सरकार को 72 घंटे में रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार को रिपोर्ट प्राप्त होने के सात दिन के भीतर एनआईए से जांच करवाने के संबंध में निर्णय लेने को कहा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में आगे की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जानी चाहिए। इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
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