1992 से राजिंदर कौर भट्ठल कोठी नंबर-46 में रह रही थीं। जब वे विभिन्न पदों पर रहते हुए सरकारी मकान में ही रहीं। जब वे सीएम के पद से हटा दी गईं तब भट्ठल पंजाब के उस एक्ट के तहत मकान में काबिज रहीं जिसके तहत एक्स सीएम सरकारी मकान में रह सकते हैं।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल के सरकारी मकान के रेंट की राशि रिफंड करने के फैसले पर जवाब मागा है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह जनता का पैसा था, इस पर आपको जवाब तो देना ही होगा।
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भट्ठल की ओर से चुनाव के लिए एनओसी प्राप्त करने के लिए जमा करवाई गई सरकारी मकान के रेंट की राशि को पंजाब सरकार ने रिफंड कर दिया था। पंजाब सरकार के इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल हुई थी।
पटियाला के एडवोकेट परमजीत सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि 1992 से राजिंदर कौर भट्ठल कोठी नंबर-46 में रह रही थीं। जब वे विभिन्न पदों पर रहते हुए सरकारी मकान में ही रहीं। जब वे सीएम के पद से हटा दी गईं तब भट्ठल पंजाब के उस एक्ट के तहत मकान में काबिज रहीं जिसके तहत एक्स सीएम सरकारी मकान में रह सकते हैं। जब भट्ठल विपक्ष के लीडर के पद से हटीं तब भी वो सरकारी मकान खाली करने को तैयार नहीं थीं।
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इस दौरान अकाली-भाजपा सरकार थी और तब हाईकोर्ट में भी एक पब्लिक इंट्रस्ट लिटिगेशन डाली गई। सुनवाई चलती गई पर भट्ठल ने मकान खाली नहीं किया। इसके बाद अकाली सरकार ने उन्हें पब्लिक प्रमाइसिस लैंड एक्ट के तहत दूसरा सरकारी मकान दे दिया। हालांकि कलेक्टर के ऑर्डर हुए कि मकान का बकाया रेंट देना होगा लेकिन भट्ठल ने रेंट नहीं दिया।
जब 2016 में चुनाव आए तब दिसंबर में एनओसी के लिए भट्ठल को रेंट भरना पड़ा। जैसे ही पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी तो 21 सितंबर 2017 की कैबिनेट में फैसला लिया गया कि भट्ठल का रेंट रिफंड कर दिया जाए। अब इसी फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।