एक महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी संपत्ति का हस्तांतरण स्वयं वरिष्ठ नागरिक ने नहीं, बल्कि उसके पति ने किया हो तो वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा-23 के तहत उस हस्तांतरण को रद्द नहीं कराया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि मृतक पति की संपत्ति से बुजुर्ग पत्नी को भरण-पोषण प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार है।
बुजुर्ग महिला का बढ़ाया गुजारा भत्ता
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बठिंडा निवासी एक बुजुर्ग महिला को मिलने वाला मासिक गुजारा भत्ता 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया। साथ ही बेटे को चार महीने के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश भी दिया गया।
साल 2011 में बेटे के नाम की थी जमीन
महिला ने अपीलीय प्राधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसके बेटे के नाम की गई 40 कनाल जमीन वापस करने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया गया था। महिला के पति ने वर्ष 2011 में अपनी 118 कनाल 15 मरला कृषि भूमि अपने बेटे दविंदर सिंह के नाम हस्तांतरित कर दी थी। बाद में महिला ने आरोप लगाया कि बेटा उसकी देखभाल नहीं कर रहा है और उसने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा-23 के तहत जमीन का हस्तांतरण रद्द करने की मांग की।