78 वर्षीय पिता के सामने बेटी की हत्या के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि जांच या अभियोजन पक्ष से कोई चूक हुई है तो उसका लाभ आरोपी को जमानत के रूप में नहीं दिया जा सकता। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए कि मामले की सुनवाई में तेजी लाकर दो से तीन माह के भीतर पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।
न्यायमूर्ति संजय वशिष्ठ की पीठ लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाना क्षेत्र में नौ अप्रैल 2023 को हुई बबलजीत कौर की हत्या के मामले में आरोपी हर्षदीप सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। घटना में 78 वर्षीय पिता के सामने उनकी बेटी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। आरोपी पिछले करीब तीन वर्ष से न्यायिक हिरासत में है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था केवल आरोपी के अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि पीड़ित और उसके परिवार को न्याय दिलाना भी उतना ही जरूरी है। यदि अभियोजन पक्ष से कोई लापरवाही हुई है तो उसका खामियाजा पीड़ित परिवार को नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी चूक आरोपी को जमानत देने का आधार नहीं बन सकती।