आठ सितंबर को अदालत ने जस्टिस रंजीत सिंह समेत तीन लोगों को कथित रिश्वत मांग से संबंधित सामग्री प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से रोक दिया था। जस्टिस रंजीत सिंह ने इस आदेश को चुनौती दी थी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर की मानहानि याचिका में नया मोड़ आ गया है। चंडीगढ़ जिला अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस एवं पंजाब मानवाधिकार संगठन के चेयरमैन जस्टिस रंजीत सिंह के खिलाफ आठ सितंबर को जारी एकपक्षीय अंतरिम रोक हटा दी। अदालत के सामने पूरी प्रेस कांफ्रेंस की वीडियो रिकॉर्डिंग और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का संबंधित आदेश रखा गया था।
विज्ञापन
जस्टिस रंजीत सिंह की ओर से एडवोकेट चरणजीत सिंह बख्शी ने वीडियो अदालत में पेश की। वीडियो देखने के बाद अदालत ने पाया कि जस्टिस रंजीत सिंह पांच करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोप को अपनी व्यक्तिगत जानकारी के तौर पर पेश नहीं कर रहे थे। वह हाईकोर्ट में दायर याचिका में लगाए गए आरोपों के संदर्भ में सवाल उठा रहे थे और उन्होंने डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ अपनी ओर से कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया था।
अदालत ने कहा कि मानवाधिकार संगठन के चेयरमैन के तौर पर मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मुद्दों पर नजर रखना और उन्हें सार्वजनिक रूप से उठाना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसी आधार पर अंतरिम रोक हटा दी गई।
विज्ञापन
गौरतलब है कि आठ सितंबर को अदालत ने जस्टिस रंजीत सिंह समेत तीन लोगों को कथित रिश्वत मांग से संबंधित सामग्री प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से रोक दिया था। जस्टिस रंजीत सिंह ने इस आदेश को चुनौती दी थी। डॉ. गुरप्रीत कौर ने बिक्रम सिंह मजीठिया, हरसिमरत कौर बादल और सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ भी आपराधिक मानहानि की शिकायत दायर की है।