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गुलजार सिंह मौत मामला: परिवार ने लगाया जबरन अंतिम संस्कार करवाने का आरोप, जनता से की भावुक अपील

Thu, 10 Sep 2026 03:29 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला

सार

दिड़बा के गांव तूरबंजारा में वित्तमंत्री की जनसभा में गुलजार सिंह को नशे पर सवाल पूछने के बाद अपमानित किया गया। इस पर उसने जहर खाकर जान दे दी थी। अब इस मामले में सियासत गरमा गई है।
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गुलजार सिंह के परिवार ने मांगा इंसाफ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नशे का दर्द बयान करने वाले गुलजार सिंह की मौत का मामला अब केवल एक सुसाइड नहीं, बल्कि सत्ता और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ एक बड़े जन-आक्रोश में बदल चुका है। 
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मृतक के परिवार ने प्रशासन और सरकार को सीधी चेतावनी दी है। परिवार ने साफ कहा है कि जब तक मुख्य आरोपियों और मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे न तो अस्थियां विसर्जित करेंगे और ना ही भोग की रस्म अदा करेंगे।


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जबरन अंतिम संस्कार कराने का आरोप
गुलजार सिंह की पत्नी और उनके तीनों बेटों ने गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया कि उन्हें गुमराह करके जल्दबाजी में गुलजार सिंह का जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया। परिवार का कहना है कि गुलजार सिंह ने मरने से पहले साफ तौर पर अपनी अंतिम वीडियो में उन चेहरों को बेनकाब किया था, जिन्होंने मंत्री के सामने सवाल पूछने पर उन पर दबाव बनाया और बेइज्जत किया। परिवार अब वीडियो में नामजद सभी दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग पर अड़ा हुआ है।

पंजाब की जनता साथ आए 
गुलजार सिंह के बेटों ने पूरे पंजाब की जनता से अपील की है। परिवार का कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके पिता की मौत की नहीं, बल्कि पंजाब के हर उस बाप की है जिसका बेटा नशे की गिरफ्त में है। जब तक इंसाफ की आखिरी चौखट तक लड़ाई नहीं पहुंचती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।



परिवार से मिले राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष
वहीं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना आज गांव तूरबंजारा पहुंचे हैं। वे गुलजार सिंह के परिवार से बातचीत कर रहे हैं। उनके साथ शीतल अंगुराल और दामन बाजवा भी हैं। परिवार ने मकवाना को गांव में फैले नशे के बारे में जानकारी दी। वहीं मकवाना ने मोबाइल से डाइंग डेक्लेरेशन देखी।  
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पंजाब में भय के साये में जी रहा दलित समाज  
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले दलित व्यक्ति गुलजार सिंह के सुसाइड मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब सरकार और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वीरवार को तूरबंजारा में पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में आयोग के चेयरमैन किशोर मकवाना ने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है बल्कि पंजाब भर में अनुसूचित जाति समाज को खौफ के साये में जीने को मजबूर कर दिया गया है। पुलिस-प्रशासन का भारी दबाव है, जिससे एससी समाज के बच्चे पढ़ाई छोड़कर नशे के दलदल में धकेले जा रहे हैं। 

मकवाना ने कहा कि गुलजार सिंह लगातार अपने इलाके में बिक रहे नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इसी वजह से उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही थीं और प्रताड़ित किया जा रहा था। आखिरकार तंग आकर उन्होंने अपनी जान दे दी। वह अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सहारा थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह दबाव बनाकर बिना किसी धार्मिक रीति-रिवाज के जबरन अंतिम संस्कार करा दिया गया है, वह निंदनीय है। श्मशान घाट तक परिवार के किसी भी सदस्य को फटकने नहीं दिया गया।

दबाव बनाकर अंतिम संस्कार की आधी अधूरी रस्में निभाई गई हैं। उन्होंने कहा कि गुलजार की मौत के बाद भी परिजनों को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे पूरा परिवार दहशत में है और पुलिस सुरक्षा की गुहार लगाई है।

चेयरमैन किशोर मकवाना ने स्पष्ट किया कि आयोग इस मामले में कतई ढिलाई नहीं बरतेगा। मामले में संलिप्त जो आरोपी विदेश भाग गया है, उसे कानून के शिकंजे में लाने के लिए प्रत्यर्पण की कार्रवाई तुरंत शुरू कराई जाएगी। पीड़ित परिवार को चौबीसों घंटे सुरक्षा देनी चाहिए और केंद्र सरकार के नियमों के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता जल्द से जल्द दिलाई जाएगी।

भाजपा पंजाब प्रधान केवल सिंह ढिल्लों, सुनील जाखड़ और अश्विनी शर्मा गुलजार सिंह के घर पहुंचे। मनप्रीत बादल भी साथ थे।

 
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