दिवाली पर सिर्फ ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति कागजों तक ही सीमित नजर आती है। प्रदेशवासी त्योहारी सीजन में करीब 145 टन पटाखे जला देते हैं जिससे हवा में छह टन से अधिक महीन कण घुलकर उसे दमघोंटू बना देते हैं। इनमें प्रतिबंधित पटाखों से होने वाला प्रदूषण भी शामिल है। यही वजह है कि दिवाली से तीन दिन पहले जींद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) वर्ष 2024 में 270 और 2025 में 364 था। दिवाली के अगले ही दिन यह क्रमशः 66 अंक बढ़कर 336 और 77 अंक बढ़कर 421 पर पहुंच गया था।
हर बार दिवाली से करीब 15 दिन पहले पटाखों से होने वाले धुएं और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रीन पटाखों और आतिशबाजी के समय की पाबंदी जैसे नियम लागू किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग नजर आती है। इन नियमों का सख्ती से पालन करवाने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है।
वर्ष 2025 में 16 अक्तूबर तक गुरुग्राम और फरीदाबाद में संयुक्त कार्रवाई के दौरान 1,112.7 किलो प्रतिबंधित पटाखे जब्त किए गए थे और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। प्रतिबंधित पटाखों की जब्ती और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई लगातार जारी रही।
हरियाणा पुलिस की ओर से अवैध पटाखों के भंडारण और निर्धारित समय से अधिक आतिशबाजी करने पर एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी का प्रावधान है। डीजीपी अजय सिंघल सभी पुलिस कमिश्नरों, एसपी और अन्य अधिकारियों को दिवाली पर पटाखों के अवैध भंडारण और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर निगरानी रखने तथा कार्रवाई करने के निर्देश दे चुके हैं।
हरियाणा में पटाखा निर्माण की 22 लाइसेंसधारी फैक्टरियां और 21 गोदाम पंजीकृत हैं। यहां सिर्फ रोशनी वाले हल्के पटाखों के निर्माण की अनुमति है। प्रदेश में पटाखों का सालाना कारोबार करीब 100 करोड़ रुपये का है।
पटाखों का धुआं फेफड़ों में, धमाकों से कानों पर चोट
पीजीआई चंडीगढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. रवींद्र खैवाल के मुताबिक, पटाखे जलने से हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है। पीएम 2.5 के कण बेहद छोटे होने के कारण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर रक्त में मिल सकते हैं। वहीं, पीएम 10 सांस तंत्र में जाकर खांसी, सांस लेने में परेशानी और एलर्जी बढ़ाते हैं।
पटाखों से सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और भारी धातुओं के कण भी निकलते हैं। इनसे अस्थमा, हृदय और फेफड़ों के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा रहता है। पटाखों के तेज धमाकों की आवाज 120 से 150 डेसिबल तक पहुंच सकती है।
इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने, कानों में घंटी बजने और तनाव की आशंका रहती है। इंसानों के साथ जानवरों को भी प्रदूषण और तेज आवाज से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। उनकी सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। पटाखों का धुआं वनस्पति, मिट्टी और जलस्रोतों को भी प्रदूषित करता है।
145 टन पटाखों से हवा में घुलेंगे छह टन से अधिक महीन कण
डॉ. रवींद्र खैवाल के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब में पटाखों के धुएं से होने वाले प्रदूषण के आंकड़े लगातार सामने आते रहे हैं। हरियाणा में त्योहारी सीजन में करीब 145 टन पटाखे जला दिए जाते हैं। इनमें लड़ियां, बम, अनार, फुलझड़ी, चकरी और रॉकेट शामिल हैं। इनमें ग्रीन पटाखों की मात्रा नगण्य होती है। प्रदेश के जींद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक, धारूहेड़ा, पानीपत और करनाल में सबसे ज्यादा पटाखे जलाए जाते हैं।
पटाखों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, प्रति किलो पटाखे जलने पर करीब 33.6 ग्राम पीएम 2.5 और 42.5 ग्राम पीएम 10 उत्सर्जित हो सकता है। इस आधार पर 145 टन पटाखे जलाने से करीब 4.87 टन पीएम 2.5 और 6.16 टन पीएम 10 हवा में घुलता है। इनके साथ सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और बेरियम व स्ट्रोंटियम जैसी धातुओं के कण भी हवा में फैलते हैं, जो फेफड़ों और हृदय के लिए नुकसानदेह हैं।
पटाखों पर रोक नहीं, प्रदूषण पर लगाम लगाए सरकार
पर्यावरण अनुसंधान पर काम करने वाले संगठन एनवायर कैटालिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया के मुताबिक, सरकार को पटाखे जलाने के लिए समय और स्थान तय करने चाहिए। केवल प्रमाणित, कम धुआं और कम आवाज वाले ग्रीन पटाखों की बिक्री सुनिश्चित हो। इसके लिए सिर्फ आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर पालन भी करवाना होगा।
बाजार में प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। प्रदूषण और ध्वनि स्तर की लगातार निगरानी होनी चाहिए। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने के साथ सख्त निगरानी भी जरूरी है। स्कूलों, कॉलोनियों और बाजारों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
पांच साल में दिवाली पर प्रदूषण का स्तर
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साल
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एक्यूआई (AQI)
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शहर
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तारीख
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2021
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490
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जींद
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5 नवंबर
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2022
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322
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गुरुग्राम
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24 अक्तूबर
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2023
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383
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रोहतक
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13 नवंबर
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2024
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336
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जींद
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31 अक्तूबर
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2025
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421
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जींद
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21 अक्तूबर
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