कपूरथला की सब डिवीजन फगवाड़ा के एक एनआरआई के साथ गबन के आरोप में एसीजेएम ने छह दोषियों को 7-7 साल की सजा और 50 -50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
एनआरआई के साथ उसी के नौकर द्वारा पांच अन्य लोगों के साथ मिलकर 59 कनाल 16 मरले जमीन का गबन करने और झूठे दस्तावेज बनाने के मामले में सजा सुनाई गई है।
जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई 2014 को कपूरथला एनआरआई थाने में छह आरोपियों गगनदीप, मनीष कपूर, मंगत राम, गुरपाल सिंह उर्फ मोंटी, प्रदीप कुमार तथा जतिंदर पर जतिंदर सिंह पुत्र बचितर सिंह वासी फगवाड़ा की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। इसकी जांच तत्कालीन एआईजी चरणजीत सिंह ने की थी।
जज सुमन पाठक द्वारा केस में 47 पन्नों का आदेश दिया है। जानकारी अनुसार बगीचा सिंह वासी पलाही गांव थाना सदर फगवाड़ा हाल वासी कैलिफोर्निया अमेरिका की 15 एकड़ जगह गांवों चक हाकिम और फगवाड़ा गरबी में पड़ती थी। पीड़ित के विदेश में रहने के चलते उनकी जमीन की देख रेख उनका नौकर मंगत राम करता था। छह नवंबर 2009 को मंगत राम ने उक्त जमीन का एक इकरारनामा गगनदीप के नाम पर बनवा दिया जबकि उसके पास तब बगीचा सिंह की तरफ से कोई पावर ऑफ़ अटॉर्नी नहीं थी।
इकरारनामे के अनुसार जमीन का सौदा 1.25 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किया गया था। वही मंगत राम ने बचितर सिंह से वर्ष 2010 में एक पावर ऑफ़ अटॉर्नी मंगवाई। जिसको इंडोस 02 जनवरी 2010 में करवाया गया। लेकिन उसमे आगे पावर ऑफ़ अटॉर्नी करने के अधिकार न होने के बावजूद मंगत राम ने 19 मई 10 तथा 25 अक्तूबर 10 को 3 स्पेशल पावर आफ अटॉर्नी, मनीष कपूर पुत्र जतिंदर सिंह, महिंद्रू मोहल्ला जालंधर को तथा एक जतिंदर पुत्र गजन सिंह मेहली गेट फगवाड़ा के नाम पर कर दी। इसमें प्रदीप कुमार ने गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किया थे। मनीष और जतिंदर ने इन्ही स्पेशल पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर 57 लोगों को 59 कनाल 16 मरले के करीब जमीन बेच दी। जब बगीचा सिंह को इस धोखाधड़ी का पता चला, तो उनकी मौत हो गई। आरोपियों ने जबरदस्ती बगीचा सिंह के फगवाड़ा वाले घर पर कब्जा भी कर लिया। इसके बाद उनके बेटे जतिंदर ने शिकायत दी और एनआरआई थाने में छह आरोपियों के खिलाफ धारा 120बी, 420, 465, 467,468 ,471 ,406 के तहत केस दर्ज करवाया।
इस केस की सुनवाई 11 साल से चल रही थी, जिसमें कुल 20 गवाह पेश किए गए। केस के दौरान ही जतिंदर सिंह की मौत हो गयी, जिसके बाद उनके एक रिश्तेदार तेजप्रीत संधू ने विदेश से आकर केस की पैरवाई की। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।