25 अक्तूबर को सात कार्यों के कोटेशन मांगे गए, जिनकी शुरुआती लागत 49,900 रुपये प्रति कार्य थी। आरोप है कि छह कार्यों की लागत बढ़ाकर करीब पांच लाख रुपये प्रति कार्य कर दी गई और तत्कालीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुखपिंदर सिंह के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से मंजूरी ली गई।
जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग में 24.34 लाख रुपये के गबन के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने छह अधिकारियों-कर्मचारियों और तीन ठेकेदारों समेत नौ लोगों पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि जलापूर्ति योजना के रखरखाव के नाम पर बिना काम करवाए फर्जी बिलों से भुगतान लिया गया।
विज्ञापन
नामजद आरोपियों में एक्सईएन जसविंदर सिंह, एसडीओ संदीप सिंह, जेई परविंदर सिंह, सीनियर असिस्टेंट जस्मित सिंह व तारा सिंह, डाटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह और ठेकेदार करनैल सिंह, हरदीप सिंह व जसवीर सिंह शामिल हैं। जांच के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2024 को योजना के रखरखाव के लिए 73.36 लाख रुपये जारी हुए थे।
25 अक्तूबर को सात कार्यों के कोटेशन मांगे गए, जिनकी शुरुआती लागत 49,900 रुपये प्रति कार्य थी। आरोप है कि छह कार्यों की लागत बढ़ाकर करीब पांच लाख रुपये प्रति कार्य कर दी गई और तत्कालीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुखपिंदर सिंह के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से मंजूरी ली गई।
विज्ञापन
सुखपिंदर सिंह ने हस्ताक्षरों से इनकार किया था। जांच में कार्य पूरे होने का रिकॉर्ड तैयार कर 28 अक्टूबर को बिल बनाने और 29 अक्टूबर को ठेकेदारों के खातों में भुगतान करने की बात सामने आई। बिना मौके का निरीक्षण किए मेजरमेंट बुक में प्रविष्टियां करने का आरोप भी है। विभागीय जांच के बाद जनवरी 2025 में एक्सईएन समेत चार कर्मचारियों को निलंबित कर मामला विजिलेंस को सौंपा गया था। इस मामले में डीएसपी विजिलेंस विनोद कुमार के अनुसार, मामले की जांच जारी है।