पंजाब पुलिस के पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह संधू ने सरकार की तरफ से अपनी बर्खास्तगी के फैसले को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। गुरशेर सिंह संधू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा है कि उसे बलि का बकरा बनाया गया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इन्कार कर दिया है।
पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह के खिलाफ यह नौकरी से निकाले जाने की कार्रवाई लॉरेंस बिश्नोई के जेल से हुए इंटरव्यू के मामले में की गई है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद विभाग ने इसी साल दो जनवरी को गुरशेर सिंह को टर्मिनेट कर दिया था। कोर्ट ने मामले में उच्च अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए थे।
चार्जशीट के सभी दस्तावेज नहीं दिए
याचिका दाखिल करते हुए गुरशेर सिंह संधू ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस मामले में बलि का बकरा बनाया गया है। नियमों का उल्लंघन करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया और उनका पक्ष तक नहीं सुना गया। संधू का यह भी कहना है कि उन्हें चार्जशीट के सभी दस्तावेज नहीं दिए गए, जिससे उनके बचाव का मौका छिन गया। उन्होंने कहा कि जब तक मुझे यह नहीं बताया जाएगा कि चार्जशीट में क्या आरोप हैं, तब तक मैं अपना बचाव कैसे करूंगा।
बर्खास्तगी के आदेशों को रद्द करने की मांग
संधू ने यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने हाल ही में इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया है। आयोग ने अभी जांच शुरू भी नहीं की और न ही कोई रिपोर्ट पेश की है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जल्दबाजी में बर्खास्त कर दिया गया। संधू ने अपनी याचिका में इस बात का भी जिक्र किया कि लॉरेंस बिश्नोई (एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स) की हिरासत में था। संधू ने हाईकोर्ट से मांग की है कि उनकी बर्खास्तगी के आदेशों को रद्द किया जाए और जब तक यह याचिका अदालत में विचाराधीन है, तब तक बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाई जाए।