लॉरेंस बिश्नोई के पुलिस हिरासत में हुए इंटरव्यू के मामले में आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रही एसआईटी के मुखिया डीजीपी प्रबोध कुमार रिटायरमेंट के बावजूद जांच जारी रखेंगे। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें सुरक्षा, स्टाफ व प्रतिमाह 1.5 लाख रुपये मुहैया करवाने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है। डीजीपी प्रबोध कुमार ने इस जांच को जारी रखने की सहमति दे दी है।
हाईकोर्ट ने जेल में सुरक्षा के इंतजाम को लेकर स्वयं संज्ञान लेते हुए सुनवाई आरंभ की थी। इसी दौरान लॉरेंस का टीवी इंटरव्यू होने की बात सामने आई थी। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को एसआईटी बनाकर जांच करने का आदेश दिया था। एसआईटी की जांच बेनतीजा रही थी, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी।
एसआईटी ने बताया था कि इंटरव्यू खरड़ सीआईए थाने में हुआ था। इसके बाद कई पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन एसएसपी पर कार्रवाई न होने के चलते पंजाब सरकार को हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी भी एसआईटी को सौंप दी थी। हाईकोर्ट को बताया गया था कि एसआईटी के मुखिया डीजीपी प्रबोध कुमार इसी महीने रिटायर होने जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को वीरवार तक ऐसे डीजीपी का नाम सौंपने का आदेश दिया था जो केंद्र सरकार से इम्पैनल हो।
वीरवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की जांच डीजीपी प्रबोध कुमार को जारी रखने का आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की एसआईटी 9 माह की जांच के बाद भी नाकाम रही थी, जबकि हाईकोर्ट द्वारा प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने बेहतरीन जांच की है और महज चार-पांच महीनों में ही मामले का अहम पहलू उजागर कर दिया।