पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर मोहाली करेगी स्टडी
जानकारी के अनुसार पंजाब में उगाई जाने वाली फसलों में भारी धातुओं की जांच के लिए यह स्टडी की जा रही है, जिसका काम पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर (पीबीटीआई) मोहाली का सौंपा गया है। इसके तहत 16 जिलों में कृषि खाद्य उत्पाद दालें, अनाज, फल, सब्जियां और दूध के 1700 सैंपल लिए जाएंगे, जिसमें यूरेनियम समेत 10 भारी धातुओं की जांच की जाएगी।
इसी तरह उन स्थानों से मिट्टी के 600 सैंपलों की जांच भी की जाएगी, जहां से कृषि खाद्य उत्पादों के सैंपल लिए जाने हैं। इसी तरह इन फसलों की सिंचाई के लिए उपयोग किए जाने वाले नहरी व ट्यूबवेलों के पानी के सैंपल भी लिए जाएंगे। स्टडी का उद्देश्य कृषि खाद्य उत्पादों, मिट्टी और सिंचाई जल के विश्लेषण के माध्यम से फूड चेन में मौजूद भारी धातुओं का आकलन करना है। जिन जिलों की 34 लोकेशनों से ये सैंपल लिए जाने हैं उनमें अमृतसर, तरनतारन, पटियाला, संगरूर, रोपड़, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, लुधियाना, फरीदकोट, जालंधर, कपूरथला, मोगा, बरनाला, नवांशहर, मोहाली और बठिंडा शामिल हैं। यह स्टडी एजेंसी डेढ़ साल के अंदर पूरी करेगी।
दूषित जल की लोकेशनों को सील करने के बाद की यह कार्रवाई
हाल ही में सरकार की तरफ से 337 लोकेशनों से दूषित पानी का पता लगाने के लिए सैंपल लिए गए थे, जिसें 34 लोकेशनों का पानी दूषित पाया गया था। इन लोकेशनों के जल स्रोतों को सील कर दिया गया है, जिसमें ट्यूबवेल समेत अन्य जल स्रोत शामिल हैं। इनमें 18 लोकेशन जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग और 16 लोकेशन स्थानीय निकाय विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। इन सभी जगहों पर दोनों विभागों की तरफ से पीने योग्य पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। फतेहगढ़ साहिब की चुन्नी कलां और भुगराना को सरफेस वाटर प्रोजेक्ट के साथ कवर किया गया है।
पानी के लिए की जा रही वैकल्पिक व्यवस्था
स्थानीय विभाग के अंदर आती अन्य निकटतम म्युनिसिपल जल स्रोतों के माध्यम से 16 सील स्थानों पर पीने योग्य पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पास के म्युनिसिपल स्रोत से पानी के सैंपल एकत्र किए गए और भारी धातुओं की पहचान के लिए 24 मापदंडों के लिए उनका विश्लेषण किया गया। इन 16 में से 10 लोकेशनों पर नतीजे स्वीकार्य सीमा के भीतर पाए गए। बाकी छह लोकेशन पर भिखीविंड, जगरांव, निहाल सिंह वाला, राहों, कोठा गुरु और भदौड़ में वैकल्पिक निकटवर्ती स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने के लिए काम किया जा रहा है। राज्य के कई जिलों के पानी में यूरेनियम व फ्लोराइड की मात्रा अधिक है।