पंजाब के पानी में खतरनाक रसायन मौजूद हैं, जो कई तरह की बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। राजस्थान, असम व उड़ीसा के बाद पंजाब सबसे अधिक इस समस्या से प्रभावित है। संसद की जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस पर चिंता जताई है।
पानी में भारी धातुओं की मौजूदगी सेहत के लिए खतरनाक है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश के पानी में यूरेनियम की मात्रा अधिक होने के कारण कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। मालवा बेल्ट इससे बुरी तरह प्रभावित है। कैंसर होने के खतरे के साथ ही यह गुर्दे को भी नुकसान पहुंचाता है। इसी तरह पानी में सेलेनियम की उच्च मात्रा से लीवर, किडनी और पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। नाइट्रेट मुख्य रूप से नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों और पशु अपशिष्ट के अनुचित निपटान के कारण होता है। यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। इससे शिशु के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है और साथ ही थायराइड रोग का भी खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह कैडमियम की अधिक मात्रा भी गुर्दे और हड्डियों की बीमारियों का कारण बन सकती है।
सूबे में पांच साल के अंदर कैंसर के मरीजों में 9.45% की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020 में सभी तरह के कैंसर के 38,636 मरीज थे और वर्ष 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 42,288 हो गई है। इसी तरह प्रदेश में वर्ष 2021 के दौरान 39,521, वर्ष 2022 में 40,435 और वर्ष 2023 के दौरान कैंसर के 41,337 मरीज सामने आए थे। पानी में भारी धातुओं की मौजूदगी को कैंसर के मामले बढ़ने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।