डिवाइस बनाने वाली टीम के अनुसार, बोलने की कोशिश करते समय होंठ, गाल और चेहरे की अन्य मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। उपकरण में लगे सेंसर इनकी गतिविधियों से जुड़े विद्युत संकेत रिकॉर्ड करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इन संकेतों के पैटर्न का विश्लेषण कर मरीज की बोलने की कोशिश को समझने में मदद करता है।
गले के कैंसर के कारण जिन मरीजों का स्वरयंत्र निकालना पड़ता है, उनके लिए अपनी बात दूसरों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। पानी मांगने, दर्द बताने या परिवार से बातचीत करने के लिए भी उन्हें लिखने और इशारों का सहारा लेना पड़ता है।
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इन मरीजों की मदद के लिए सीएसआईआर-केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ), चंडीगढ़ ने खास डिवाइस विकसित किया है। यह चेहरे की मांसपेशियों की गतिविधियों से मिलने वाले सूक्ष्म विद्युत संकेतों को पहचानकर मरीज की बात आवाज के रूप में व्यक्त करने में मदद करेगा।
डिवाइस बनाने वाली टीम के अनुसार, बोलने की कोशिश करते समय होंठ, गाल और चेहरे की अन्य मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। उपकरण में लगे सेंसर इनकी गतिविधियों से जुड़े विद्युत संकेत रिकॉर्ड करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इन संकेतों के पैटर्न का विश्लेषण कर मरीज की बोलने की कोशिश को समझने में मदद करता है। इसका उद्देश्य चेहरे की गतिविधियों से मिले संकेतों को शब्दों से जोड़कर आवाज में बदलना है।
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पानी मांगने से लेकर परेशानी बताने तक मिलेगी मदद
डिवाइस की मदद से मरीज अपनी जरूरतें परिवार के सदस्यों और देखभाल करने वालों तक पहुंचा सकेंगे। पानी मांगने या दर्द जैसी परेशानी बताने के लिए उन्हें केवल लिखने या हाथों के इशारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। स्वरयंत्र निकलने के बाद सामान्य तरीके से बोलने में असमर्थ मरीजों के लिए यह संवाद का एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।
कंपनी के साथ मिलकर आगे बढ़ेगा अनुसंधान
सीएसआईओ के निदेशक डॉ. शांतनु भट्टाचार्य ने बताया कि तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए सीएसआईआर-सीएसआईओ ने शिताशी इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड (एसआईपीएल) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। इसके तहत सहायक चिकित्सा उपकरणों के विकास और अनुसंधान में सहयोग किया जाएगा।
परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. संजीव कुमार हैं। कंपनी की ओर से डॉ. सुनीता मेहता, मीनू मेहता और संगीता वालिया इस पहल से जुड़ी हैं। स्वरयंत्र निकलने के बाद मरीजों को संवाद के लिए लिखने, इशारों या अन्य उपकरणों का सहारा लेना पड़ सकता है। ऐसे में चेहरे की गतिविधियों को आवाज में बदलने वाली तकनीक उनकी रोजमर्रा की जरूरतें बताने और अपनों से बातचीत करने में मददगार हो सकती है।