विजिलेंस ब्यूरो ने शिअद के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर शिकंजा और कस दिया है। पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, ईडी के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह और पूर्व विधायक बोनी अजनाला के बाद सोमवार को अकाली नेता मनिंदर सिंह उर्फ बिट्टू औलख और जगजीत सिंह चहल ने बयान दर्ज करवाए।
बिट्टू ने कहा बताया कि विजिलेंस और एसआईटी ने उनसे मजीठिया के साथ वित्तीय लेनदेन, बेनामी संपत्ति या साझा जायदाद को लेकर सवाल किए। उन्होंने कहा कि यह मुख्य मामला ड्रग्स का है। 2013 में जब यह मामला सामने आया था, तब अगर पुलिस ने इसमें सही जांच की होती तो सच्चाई सबके सामने होती। हमने सीबीआई जांच की भी मांग की थी। बिट्टू ने कहा कि तत्कालीन एसएसपी हरदयाल मान को अगर विजिलेंस पूछताछ के लिए बुलाए तो सब साफ हो सकता है।
बिट्टू ने कहा कि अगर उसकी ड्रग्स में संलिप्तता पाई जाती है तो उसे चौक पर खड़ा कर गोली मार देना। बिट्टू ने आरोप लगाया कि मुझे और चहल समेत कई लोगों को सिर्फ फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि 2010 तक मजीठिया से उनके संबंध अच्छे थे और तब उनकी कोई साझा संपत्ति नहीं थी। बिट्टू ने कहा कि ईडी के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह ने भी जांच सही नहीं की है। उन्होंने कहा कि किसने पैसे लिए और जमीन बेची, यह सबके सामने आना चाहिए।
आज तक सिर्फ ड्रामा होता रहा
जगजीत सिंह चहल ने कहा कि अब जिस तरह से जांच चल रही है, उससे लगता है कि यह निष्कर्ष तक पहुंचेगी। आज तक सिर्फ ड्रामा होता गया। किसी भी एसआईटी ने जांच सही नहीं की। पांच से छह एसआईटी बन चुकी हैं, लेकिन आज तक सिर्फ राजनीति हो रही थी। अब अधिकारियों की गंभीरता से लगा है कि यह जांच सिरे चढ़ेगी। हम ड्रग्स के खिलाफ हैं, लेकिन हमें नहीं पता था कि हमारे खिलाफ इस तरह होगा। सीएम मान से अपील है कि 2013 में ड्रग्स रैकट की पूरी जांच होनी चाहिए। अगर हम इस जांच में कसूरवार निकलते हैं तो हमें सजा दी जानी चाहिए।