पंजाब में नशा बड़ी समस्या है। सूबे में नशा तस्करी के मामलों में पुरुष ही नहीं महिलाएं भी आगे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि नशा तस्करी मामलों (एनडीपीसी एक्ट) में 95 महिला गुरदासपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। जेल के महिला सेल में कुल 111 महिला बंदी व कैदी हैं, जिनमें 95 महिलाएं नशा तस्करी की आरोपी और सजा काट रही हैं।
बुधवार को रेड क्रॉस इंटीग्रेटेड एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्ट्स गुरदासपुर की तरफ से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत गुरदासपुर केंद्रीय जेल के महिला सेल में नशे के खिलाफ जागरूकता सेमिनार करवाया गया। इस सेमिनार का नेतृत्व नेशनल अवार्डी व प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. रोमेश महाजन ने किया।
सेमिनार के दौरान यह खुलासा हुआ कि जेल के महिला सेल में मौजूद 111 कैदियों में से 95 महिलाएं एनडीपीएस एक्ट के तहत बंद हैं। यह आंकड़ा समाज में नशे की बढ़ती समस्या और महिलाओं की संलिप्तता को दर्शाता है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। डॉ. रोमेश महाजन ने कहा कि नशे का उपयोग और व्यापार से जुड़ी महिलाएं न केवल अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही हैं, बल्कि युवाओं और उनके परिवारों के भविष्य को भी खतरे में डाल रही हैं।
आईआरसीए की टीम ने महिला कैदियों को नशे से दूर रहने और सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। डॉ. महाजन ने महिलाओं को सजा पूरी होने के बाद समाज में पुनर्वास के लिए कौशल सीखने की सलाह दी। उन्होंने कटिंग और सिलाई, कढ़ाई, और ब्यूटीशियन प्रशिक्षण जैसे कोर्स की महत्वता पर जोर दिया, जो महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर सकते हैं।
डॉ. महाजन ने जिला बाल कल्याण परिषद द्वारा महिला सेल में संचालित परियोजनाओं, जैसे कि क्रेच सेंटर, प्रारंभिक शिक्षा अध्ययन केंद्र और कौशल प्रशिक्षण केंद्रों का उपयोग करने की अपील की। ये सुविधाएं महिलाओं और उनके बच्चों की उचित देखभाल और विकास को सुनिश्चित करने के लिए हैं। प्रशिक्षण पूरा करने पर सर्टिफिकेट प्रदान किए जाते हैं, जो महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद करते हैं।
सेमिनार के दौरान सभी महिला कैदियों ने शपथ ली कि वे भविष्य में किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगी और समाज को नशा मुक्त बनाने में योगदान देंगी। उन्हें नशीले पदार्थों के व्यापार में शामिल न होने की सलाह दी गई, क्योंकि इससे युवाओं की जिंदगी बर्बाद होती है।