हरदेव सिंह ने 27 मार्च 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मुक्तसर साहिब द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी है। इसमें निर्णय-ऋणियों की संपत्ति कुर्क करने के वारंट जारी किए गए थे।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने श्री मुक्तसर साहिब की अदालत में निष्पादन कार्यवाही से जुड़े मामले में आदेश में सामने आए विरोधाभास पर जिला जज से स्थिति रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने 19 अगस्त के आदेश में दर्ज विसंगतियों को स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
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हरदेव सिंह ने 27 मार्च 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मुक्तसर साहिब द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी है। इसमें निर्णय-ऋणियों की संपत्ति कुर्क करने के वारंट जारी किए गए थे। सुनवाई के दौरान पंजाब राज्य भंडारण निगम के वकील ने 19 अगस्त का आदेश पेश करते हुए कहा कि पक्षकारों से संबंधित 21 अप्रैल 2026 का हाईकोर्ट का कोई ऐसा आदेश नहीं था जिसके आधार पर निष्पादन कार्यवाही पर रोक लगाई जा सके।
याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि 21 अप्रैल को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 के तहत लंबित आवेदन पर सुनवाई करते हुए रोक लगाई थी। इसके बावजूद निष्पादन अदालत ने इसे हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक दर्ज किया।
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जस्टिस लपिता बनर्जी की पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला जज से रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आदेश में डिक्री धारक के वकील की मौजूदगी कैसे दर्ज हुई जबकि उसकी उपस्थिति का इंतजार बताया गया था। निर्णय-ऋणी तीन से छह को एकतरफा बताया गया लेकिन उनके वकील की मौजूदगी भी दर्ज है। अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।