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पंजाब कांग्रेस बगावत में ट्विस्ट: चन्नी, वड़िंग और रंधावा दिल्ली तलब, आखिर क्या था हाईकमान का संदेश?

Mon, 20 Jul 2026 10:43 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

पंजाब कांग्रेस में चल रही बगावत इन दिनों शांत दिखाई दे रही है। सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने दोनों धड़ों के नेताओं को गुप्त संदेश दिया है। वहीं, मंगलवार को चन्नी, वड़िंग और रंधावा को दिल्ली बुलाया गया है।
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बघेल, वड़िंग, चन्नी और रंधावा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब कांग्रेस में चल रही बगावत के बीच अचानक सन्नाटा पसर गया है। इस प्रकरण में प्रभारी भूपेश बघेल और संगठन सचिव केसी वेणुगोपाल दोनों की अलग-अलग रिपोर्टें राहुल गांधी की टेबल पर हैं। राहुल इस मसले पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से चर्चा भी कर चुके हैं, मगर कोई निर्णय लेने से फिलहाल परहेज किया जा रहा है।
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चन्नी, वड़िंग, रंधावा और सिंगला दिल्ली तलब
इसी बीच हाईकमान के आदेश पर अब प्रभारी बघेल ने मंगलवार को चन्नी, वड़िंग और रंधावा  को दिल्ली बुलाया है। हालांकि दिल्ली में इस बैठक को पंजाब कांग्रेस की बगावत से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बैठक के दौरान इस मसले पर चर्चा भी हो सकती है मगर पार्टी सूत्र बताते हैं कि यह बैठक चुनावी तैयारियों और प्रचार अभियान को धार देने के लिए रणनीति बनाने के मकसद से बुलाई गई है।
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कांग्रेस ने चुनाव के लिए कसी कमर
दरअसल, कांग्रेस ने पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चार कमेटियों का गठन किया है। इनमें पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष, विजयइंदर सिंगला को इलेक्शन मैनेजमेंट एंड कोआर्डिनेशन कमेटी का अध्यक्ष, पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी व डॉ. अमर सिंह को मैनिफेस्टो कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इस व्यवस्था में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद पर कायम रखा गया है।

सूत्र बताते हैं कि हाईकमान ने इस विवाद के बीच प्रभारी भूपेश बघेल को पंजाब में चुनावी तैयारियां आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसी के चलते उन्होंने उक्त सभी नेताओं को मंगलवार को दिल्ली बुलाया है। हालांकि प्रभारी बघेल और संगठन सचिव वेणुगोपाल द्वारा बगावत के मामले संबंधी रिपोर्ट हाईकमान तक पहुंचाने के बाद से विरोधियों के सुर अभी शांत हैं।
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लिहाजा हाईकमान चाहता है कि दोनों पक्षों के नेता यदि दिल्ली आकर मिलकर चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे, तो संभवतः एक साथ बैठने पर उनके मनमुटाव और मतभेद कुछ कम हो जाएंगे क्योंकि एक जुलाई के बाद जब से विवाद उभरा है, दोनों धड़ों के नेता एक साथ नहीं बैठे हैं।

उधर, हाईकमान भी अब इस पूरे मसले को तूल नहीं देना चाहता है। सूत्र यह भी बताते हैं कि हाईकमान की ओर से दोनों धड़ों के नेताओं को इस विवाद से संबंधित गोपनीय संदेश दिया जा चुका है, जिसके बाद से फिलहाल सन्नाटा पसरा हुआ है।
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